पश्चिमी प्रशांत महासागर का परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात, जिसकी निरंतर हवा 119 km/h या उससे ऊपर पहुँच चुकी हो। यही तूफान अटलांटिक में हरिकेन कहलाता है और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात — नाम तीन, परिघटना एक।
घटनाएँटाइफून क्या है?
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के पश्चिम और भूमध्य रेखा के उत्तर — यानी पश्चिमी प्रशांत महासागर में — जो उष्णकटिबंधीय चक्रवात परिपक्व होकर दस मिनट की औसत निरंतर हवा 119 km/h (33 m/s, या 64 नॉट) तक पहुँचा देता है, उसे टाइफून कहा जाता है। इस सीमा से नीचे वह अब भी तूफान है, पर टाइफून नहीं।
नाम भूगोल की देन है; भीतर का तंत्र हर जगह एक ही रहता है:
- पश्चिमी प्रशांत — टाइफून
- अटलांटिक और उत्तर-पूर्वी प्रशांत — हरिकेन
- उत्तरी हिंद महासागर, यानी बंगाल की खाड़ी और अरब सागर — उष्णकटिबंधीय चक्रवात, जिसे बुलेटिन में “अति गंभीर चक्रवाती तूफान” या उससे ऊँची किसी श्रेणी में रखा जाता है
- दक्षिणी हिंद महासागर और दक्षिणी प्रशांत — उष्णकटिबंधीय चक्रवात
शब्द की जड़ें दो दिशाओं में जाती हैं — चीनी ताइफ़ेंग और संभवतः अरबी तूफ़ान; दोनों का अर्थ “महान हवा” है।
गिनती के लिहाज से पश्चिमी प्रशांत धरती का सबसे व्यस्त चक्रवात बेसिन है — हर साल औसतन 25.3 नामित तूफान, किसी भी दूसरे महासागर से ज्यादा। फिलीपींस इसी रास्ते के बीचों-बीच पड़ता है और साल में औसतन 20 नामित तूफानों का सामना करता है, जिनमें से 8–9 जमीन से टकराते हैं। भारत, पाकिस्तान या बांग्लादेश के पाठक तक यह शब्द खबरों के रास्ते पहुँचता है, और उसके साथ यह उलझन भी कि यह अपने यहाँ के चक्रवात से अलग कोई चीज है या नहीं।
गर्म समुद्र की छह शर्तें और JMA का पैमाना
टाइफून पैदा होने की शर्तें वही हैं जो किसी भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात की:
- समुद्र की सतह का तापमान ऊपरी 50 मीटर में 26.5°C या उससे ऊपर।
- निचले क्षोभमंडल में ऊँची आर्द्रता।
- कमजोर ऊर्ध्वाधर पवन कतरनी — 10 m/s से नीचे।
- पहले से मौजूद कोई विक्षोभ, जो अकसर कोई पूर्वी तरंग होती है।
- भूमध्य रेखा से पर्याप्त दूरी, आम तौर पर 5° अक्षांश से आगे, ताकि कोरिऑलिस बल तंत्र को घुमाव दे सके।
- गहरे संवहन को टिकाए रखने लायक वायुमंडलीय अस्थिरता।
पश्चिमी प्रशांत की खासियत यह है कि ये शर्तें वहाँ साल के ज्यादातर हिस्से में एक साथ पूरी मिलती हैं — इसी वजह से यह बेसिन बाकी सब महासागरों से ज्यादा चक्रवात पैदा करता है। गतिविधि कभी पूरी तरह रुकती नहीं, फिर भी मुख्य मौसम जुलाई से नवंबर तक चलता है: जून–जुलाई में रफ्तार मध्य फिलीपींस और दक्षिण चीन सागर के ऊपर पकड़ती है, अगस्त–सितंबर में सबसे ज्यादा लैंडफॉल होते हैं, और अक्टूबर–नवंबर के देर से आने वाले सुपर टाइफून आम तौर पर सबसे तीव्र निकलते हैं।
नापने का तरीका एजेंसी-दर-एजेंसी बदल जाता है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) दस मिनट की औसत हवा पर यह सीढ़ी चलाती है:
- उष्णकटिबंधीय अवदाब — 62 km/h से कम
- उष्णकटिबंधीय तूफान — 62 से 88 km/h
- गंभीर उष्णकटिबंधीय तूफान — 89 से 117 km/h
- टाइफून — 118 से 156 km/h
- अति प्रबल टाइफून — 157 से 192 km/h
- हिंसक टाइफून — 193 km/h और उससे ऊपर
संयुक्त टाइफून चेतावनी केंद्र (JTWC) इसके बजाय वही सैफिर-सिंपसन पैमाना चलाता है जो अटलांटिक के हरिकेन पर लगता है, जिसमें श्रेणी 5 की शुरुआत 252 km/h से ऊपर होती है। खबरों का “सुपर टाइफून” आम तौर पर श्रेणी 4 या 5 के बराबर का तूफान होता है।
टाइफून भारत और दक्षिण एशिया में
दक्षिण एशिया के तूफान औपचारिक रूप से अलग बेसिन के हैं — बंगाल की खाड़ी और अरब सागर उत्तरी हिंद महासागर में गिने जाते हैं, प्रशांत में नहीं। फिर भी दोनों के बीच कई धागे जुड़े हुए हैं:
- मैडेन-जूलियन दोलन (MJO) प्रशांत के टाइफून और हिंद महासागर के चक्रवात, दोनों को एक साथ घटाता-बढ़ाता है।
- अल नीनो और ला नीना के दौर दोनों बेसिनों पर असर डालते हैं।
- हिंदचीन प्रायद्वीप पार करने वाले टाइफून के अवशेष कभी-कभी बंगाल की खाड़ी में नई उष्णकटिबंधीय हलचल का बीज डाल देते हैं।
- म्यांमार के ऊपर से गुजरते इन्हीं अवशेषों से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों — अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम — में कभी-कभार भारी बारिश होती है।
बांग्लादेश और म्यांमार की मौसम प्रणालियाँ भी टाइफून-प्रभावित इलाकों से साझा चलती हैं। 2008 के चक्रवात नरगिस को, म्यांमार में उसके लैंडफॉल की वजह से, अनौपचारिक बातचीत में कभी-कभी टाइफून कह दिया जाता है। व्यावहारिक नतीजा यह है कि अपने तट के लिए पाठक को अलग शब्दावली और अलग एजेंसी के बुलेटिन देखने पड़ते हैं, जबकि पीछे का भौतिक विज्ञान वही रहता है।
तट पर क्या टूटता है: हवा, लहर और 1,500 mm तक बारिश
बड़ा टाइफून एक साथ कई आफतें लाता है, और नुकसान किसी एक से नहीं, उनके जोड़ से होता है:
- 120 से 250 km/h और उससे ऊपर की निरंतर हवा, जो इमारतों और बुनियादी ढाँचे को चपटा कर देती है।
- 2 से 7 मीटर या उससे ऊँची तूफानी लहर, जो तटीय इलाकों में पानी भर देती है।
- पूरे प्रकरण में 300 से 1,500 mm बारिश।
- खड़ी ढलानों पर भूस्खलन — फिलीपींस, ताइवान और जापान के पहाड़ों में यह आम है।
- बाहरी पट्टियों में कभी-कभी बन जाने वाले बवंडर।
फिलीपींस और वियतनाम इस मार को सबसे ज्यादा झेलते हैं, और इसकी वजहें सामाजिक जितनी हैं उतनी ही भौगोलिक: तट पर घनी आबादी, चक्रवात झेल सकने वाले ढाँचे की कमी, और पहाड़ी भूभाग जो बारिश तथा बाढ़ दोनों को बढ़ा देता है।
खेती और आवाजाही पर असर तूफान के गुजर जाने के बाद ज्यादा दिखता है — ढलानों से उतरा मलबा पहाड़ी रास्ते काट देता है, और पानी उतरने तक खेत तथा बस्तियाँ पहुँच से बाहर रहती हैं। दक्षिण एशिया के पाठक के लिए यह जानी-पहचानी तस्वीर है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी का चक्रवात भी ठीक इन्हीं हथियारों से नुकसान करता है।
हैयान, यागी और वह चेतावनी जिसने आँकड़े बदले
वियतनाम के 1881 के हाइफोंग तूफान के लिए अकसर 3,00,000 तक मौतों का आँकड़ा दोहराया जाता है, पर वह शायद एक भूल है — WMO के एक आकलन के मुताबिक यह संख्या उस समय हाइफोंग की आबादी से मेल नहीं खाती। हाल के दौर की सबसे भारी आपदा 2013 का टाइफून हैयान रहा, जिसे फिलीपींस में योलांडा कहा गया: 6,300 से ज्यादा मौतें, और लैंडफॉल के वक्त एक मिनट के औसत पर 315 km/h की निरंतर हवा।
तीव्रता के पैमाने पर भी हैयान सबसे ऊपर की कतार में बैठता है — 895 hPa का केंद्रीय दबाव, और जमीन से टकराते वक्त वह रिकॉर्ड पर दर्ज सबसे तीव्र तूफानों में से एक था; 2021 का टाइफून सुरिगे भी 895 hPa तक गिरा। 2020 में फिलीपींस से टकराया गोनी लैंडफॉल के समय 220 km/h पर था — यह JMA की दस मिनट की औसत हवा है; JTWC की एक मिनट की औसत हवा के हिसाब से वह रिकॉर्ड का सबसे शक्तिशाली लैंडफॉल करने वाला टाइफून है। अंतरराष्ट्रीय असर के लिहाज से 2018 का मैंगखुट याद किया जाता है, जिसने पहले फिलीपींस, फिर हांगकांग और मकाऊ को तोड़ा, और 2024 का यागी, जो दशकों में वियतनाम का सबसे घातक टाइफून रहा।
चेतावनी का ढाँचा इन्हीं आपदाओं के बीच खड़ा हुआ। पर्ल हार्बर स्थित संयुक्त टाइफून चेतावनी केंद्र और जापान मौसम विज्ञान एजेंसी हर छह घंटे पर, पाँच दिन आगे तक के ट्रैक पूर्वानुमान जारी करते हैं; फिलीपींस की PAGASA तथा वियतनाम और चीन की राष्ट्रीय एजेंसियाँ उन्हें स्थानीय चेतावनियों और निकासी आदेशों में बदलती हैं। रास्ता संचालक धाराओं पर निर्भर करता है: ज्यादातर टाइफून पश्चिम या उत्तर-पश्चिम बढ़कर फिलीपींस पहुँचते हैं, फिर या तो उत्तर मुड़कर जापान और कोरिया की ओर जाते हैं, या पश्चिम बढ़ते हुए वियतनाम, चीन और हाइनान से टकराते हैं।
सुधार गिना भी जा सकता है। 72 घंटे के ट्रैक पूर्वानुमान की गलती 1990 के करीब 400 km से घटकर अब 200 km से नीचे आ चुकी है। 2013 में हैयान से पहले बड़े पैमाने पर निकासी कराई गई थी, बाद की आपदाओं में यह काम और बेहतर हुआ है, और जापान तथा ताइवान के आधुनिक भवन नियम नुकसान को सीमित रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टाइफून और चक्रवात में क्या फर्क है? फर्क सिर्फ नाम का है। दोनों एक ही किस्म के तूफान हैं — परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात, जिनकी निरंतर हवा 119 km/h से ऊपर हो। पश्चिमी प्रशांत में वह टाइफून कहलाता है, अटलांटिक तथा पूर्वी प्रशांत में हरिकेन, और हिंद महासागर व दक्षिणी प्रशांत में चक्रवात।
फिलीपींस पर इतने टाइफून क्यों गिरते हैं? वह द्वीपसमूह पश्चिमी प्रशांत के मुख्य टाइफून “राजमार्ग” पर ही बसा है — तूफानों को पश्चिम या उत्तर-पश्चिम की ओर ले जाने वाली संचालक धाराओं के ठीक रास्ते में। ऊपर से तटीय शहरों की घनी आबादी, पहाड़ और नदी-डेल्टा मिलकर उसे हवा, लहर और बारिश तीनों के सामने बेहद असुरक्षित बना देते हैं।
क्या कोई टाइफून बंगाल की खाड़ी तक पहुँच सकता है? कभी-कभी। उत्तरी वियतनाम और लाओस पार करने वाले टाइफून कमजोर तंत्र के रूप में म्यांमार या बंगाल की खाड़ी के ऊपर फिर उभर सकते हैं, और कभी-कभार वहीं खाड़ी के चक्रवात में पुनर्गठित हो जाते हैं। प्रशांत और हिंद महासागर के चक्रवात तंत्र जिन कई रास्तों से आपस में जुड़े हैं, यह उनमें से एक है।
क्या टाइफून पहले से ताकतवर हो रहे हैं? शोध यही संकेत देता है। पिछले 40 वर्षों में श्रेणी 4 और 5 तक पहुँचने वाले टाइफून का अनुपात बढ़ा है, जबकि कुल संख्या में खास बदलाव नहीं आया। गर्म होती समुद्री सतह से ज्यादा तीव्र तूफानों की जो सैद्धांतिक अपेक्षा है, यह उसी के अनुरूप है।
अपने शहर का मौसम मैं कहाँ देखूँ? मौसम ऑनलाइन दक्षिण एशिया पर केंद्रित है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों पर नजर रखनी हो — जिनके कई चालक प्रशांत के टाइफून से साझा हैं — तो कोलकाता, चेन्नई, भुवनेश्वर, गुवाहाटी और मुंबई के पन्ने देखें।