मुख्य सामग्री पर जाएं

तूफानी लहर

चक्रवात के साथ तट पर चढ़ आने वाला समुद्र — तट की ओर बहती हवा पानी को किनारे पर ढेर करती है और गिरता वायुदाब उसे ऊपर खींचता है। चक्रवात का सबसे जानलेवा हिस्सा यही रहा है, और धरती पर कहीं भी बंगाल की खाड़ी के उत्तरी सिरे जितना नहीं।

घटनाएँ

तूफानी लहर क्या है?

समुद्र का वह उभार जिसे कोई उष्णकटिबंधीय चक्रवात तट की ओर धकेल देता है, तूफानी लहर कहलाता है। हवा पानी को किनारे पर ढेर करती जाती है, गिरता वायुदाब उसे ऊपर खींचता है, और कुछ घंटों में समुद्र का एक चलता-फिरता गुंबद तट पार करके जमीन के किलोमीटरों भीतर तक भर जाता है।

ऊँचाई हमेशा उस दिन के सामान्य अनुमानित ज्वार के ऊपर नापी जाती है — तीन मीटर की लहर यानी उस स्तर से तीन मीटर ऊपर, जहाँ पानी उस घड़ी वैसे भी होता। यह उभार जब ऊँचे ज्वार के वक्त तट से टकराता है, तो दोनों मिलकर जो जलस्तर बनाते हैं उसे तूफानी ज्वार कहते हैं, और जमीन को डुबाता यही संयुक्त स्तर है।

चक्रवातों के पूरे इतिहास में सबसे ज्यादा जानें हवा ने नहीं, इसी पानी ने ली हैं — और धरती के किसी तट ने बंगाल की खाड़ी के उत्तरी सिरे जितने लोग इसमें नहीं खोए।

समुद्र को ऊपर उठाने वाली तीन ताकतें

  1. हवा का ढेर। तट की ओर लगातार बहती हवा सतह के पानी को किनारे की तरफ घसीटती है। गहरे समुद्र में यह अतिरिक्त पानी नीचे उतरकर लौट सकता है, पर उथले महाद्वीपीय शेल्फ पर उसके जाने की जगह नहीं बचती और वह तट से टकराकर चढ़ता जाता है। लहर का सबसे बड़ा हिस्सा यही होता है, और इसीलिए उथले तट खड़ी ढलान वाले तटों से कहीं ज्यादा भुगतते हैं।
  2. दबाव का खिंचाव। वायुदाब जितने हेक्टोपास्कल गिरता है, समुद्र की सतह लगभग उतने ही सेंटीमीटर ऊपर उठ जाती है — एक hPa पर करीब एक सेंटीमीटर, मानो समुद्र कोई विशाल उलटा बैरोमीटर हो। जिस चक्रवात का केंद्रीय दबाव सामान्य से 60–70 hPa नीचे चला गया हो, वह हवा के कुछ करने से पहले ही अपने नीचे का समुद्र 60–70 सेंटीमीटर उठा चुका होता है।
  3. लहरों का धक्का। किनारे पर टूटती बड़ी लहरें और पानी आगे ढकेलती हैं, जिससे औसत जलस्तर और ऊपर जाता है — और वे लहरें खुद इसी चढ़े हुए पानी पर सवार होकर आती हैं।

फिर ज्वार की बारी आती है: जो उभार भाटे के समय सँभाला जा सकता है, वही ऊँचे ज्वार पर तबाही बन जाता है। तट से टकराने का समय ज्वार-तालिका में कहाँ पड़ रहा है, पूर्वानुमान करने वाले सबसे पहले यही देखते हैं।

जगह भी उतनी ही मायने रखती है। उत्तरी गोलार्ध में सबसे ऊँचा पानी चक्रवात के रास्ते के दाईं ओर उठता है, जहाँ हवाएँ तट की तरफ बहती हैं; बाईं ओर हवा समुद्र की दिशा में बहती है, पानी कुछ देर पीछे हट सकता है और फिर लौटकर टूट पड़ता है। चरम बिंदु प्रायः वहीं पड़ता है जहाँ आँख की दीवार तट पार करती है।

तूफानी लहर भारत और दक्षिण एशिया में

बंगाल की खाड़ी का उत्तरी सिरा दुनिया में तूफानी लहर का सबसे खतरनाक कोना है, और वजहें भूगोल में लिखी हैं। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के सामने का शेल्फ चौड़ा और उथला है, इसलिए हवा का ढेर असामान्य ऊँचाई तक बनता है। खाड़ी उत्तर की ओर सँकरी होती जाती है और कीप की तरह पानी को अपने सिरे में समेट देती है। गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना डेल्टा और सुंदरबन का बड़ा हिस्सा समुद्र तल से बस कुछ मीटर ऊपर है, नदी-मुहानों और धाराओं से कटा हुआ — वही रास्ते पानी को दूर भीतर पहुँचाते हैं, और नीची चरें सीधे उसकी राह में पड़ती हैं। सिरे पर ज्वार का अंतर भी बड़ा है, इसलिए बड़े ज्वार के दिन आई लहर पहले से चढ़े समुद्र में जुड़ती है। इन्हीं डेल्टा और द्वीपों पर, समुद्र से चंद किलोमीटर के भीतर, लाखों लोग रहते हैं।

रिकॉर्ड भयावह है। 1970 का भोला चक्रवात तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश से टकराया और अनुमानतः तीन से पाँच लाख जानें ले गया — दर्ज इतिहास का सबसे घातक उष्णकटिबंधीय चक्रवात; उस रात के विवरण करीब दस मीटर ऊँचे पानी के समुद्री द्वीपों पर से गुजरने की बात कहते हैं। 1991 में चटगाँव के तट पर लगभग छह मीटर की लहर चढ़ी और करीब 1,38,000 लोग मारे गए। 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन में लगभग दस हजार मौतें हुईं, 2007 में सिद्र ने दक्षिण-पश्चिम बांग्लादेश में तीन हजार से ज्यादा जानें लीं, 2008 में नरगिस ने म्यांमार के इरावदी डेल्टा में करीब 1,38,000 लोगों को मारा या लापता किया, और 2020 में अम्फान से सुंदरबन के दोनों ओर करीब 130 मौतें दर्ज हुईं। अधिकांश मौतें लहर के पानी में डूबने से हुईं।

अरब सागर की तरफ तस्वीर अलग है। भारत के पश्चिमी तट पर ज्यादातर जगह शेल्फ तेजी से गहरा होता जाता है, इसलिए वहाँ के चक्रवात आम तौर पर छोटी लहर बनाते हैं। पर गुजरात का कच्छ और पाकिस्तान का सिंध — सिंधु डेल्टा और कराची के आसपास का तट — चपटे, नीचे और खुले हुए हैं। जून 2023 में बिपरजॉय के आने से पहले गुजरात में एक लाख से ज्यादा और सिंध में कई दसियों हजार लोग वहाँ से हटाए गए थे।

पानी पहुँचने के बाद: डूबना, नमक और कटे हुए रास्ते

हर तूफान से एक ही सबक बार-बार निकला है — लहर उन्हीं को मारती है जो पानी आने के वक्त नीची जमीन के घरों में बचे रह जाते हैं।

खतरा इसलिए भी बढ़ता है कि सबसे तेज हवा से घंटों पहले पानी चढ़ने लगता है: नीची सड़कें और पुल पहले डूबते हैं और निकलने का रास्ता तब कटता है जब हवा अभी तेज ही हो रही होती है। इसीलिए निकासी के आदेश इतने पहले दिए जाते हैं, और हालात बिगड़ते देखने के लिए रुकना इतना खतरनाक है।

खेतों पर असर सबसे देर तक रहता है। समुद्र का खारा पानी मिट्टी में बैठ जाता है, और लहर उतरने के बाद भी खारी जलमग्नता जमीन पर टिकी रहती है।

मौतों का आँकड़ा कैसे घटाया गया

ऊपर गिनाए गए आँकड़ों में बांग्लादेश में मौतों की घटती संख्या संयोग नहीं है। 1970 के बाद बांग्लादेश ने 1972 में चक्रवात तैयारी कार्यक्रम खड़ा किया — गाँव-दर-गाँव चेतावनी पहुँचाने वाली व्यवस्था, जिसे हजारों प्रशिक्षित स्वयंसेवक लाउडस्पीकर और झंडियों के सहारे चलाते हैं। साथ ही हजारों ऊँचे कंक्रीट के आश्रय बने, तटबंध खड़े हुए और मैंग्रोव की पट्टियाँ लगाई गईं। 2007 में सिद्र कई मीटर ऊँची लहर लेकर आया, फिर भी मरने वालों की संख्या 1970 के सामने बहुत छोटा अंश रह गई।

ओडिशा ने 1999 के बाद यही रास्ता पकड़ा: भारत का पहला राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बना, आश्रयों का जाल बिछा और निकासी की योजनाएँ तैयार हुईं। 2013 में फैलिन और 2019 में फानी जब उतनी ही ताकत से टकराए, हर बार करीब दस लाख लोग रास्ते से हटाए गए और मौतें हजारों की जगह दर्जनों में गिनी गईं। निचोड़ सीधा है — निकासी काम करती है।

बढ़ते समुद्र के साथ लहर की नई पहुँच

समुद्र तल का बढ़ना वह बुनियाद ही ऊपर कर देता है जहाँ से हर लहर शुरू होती है। नतीजा यह कि आज वही तूफान पानी को जमीन के भीतर उससे दूर तक ले जाता है जहाँ तक सौ साल पहले पहुँचाता। बांग्लादेश के तट और सुंदरबन में, जहाँ कहीं-कहीं जमीन खुद भी धँस रही है, गर्म होती जलवायु चक्रवात का खतरा सबसे सीधे इसी रास्ते से बढ़ाती है — और यही कारण है कि लहर के बाद खेतों का खारापन अब पहले से लंबा टिकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तूफानी लहर और सुनामी में क्या फर्क है? तूफानी लहर तूफान की हवा और कम दबाव से बनती है और चक्रवात के पास आने के साथ कई घंटों में चढ़ती है। सुनामी तब बनती है जब भूकंप या भूस्खलन समुद्र-तल को हिला देता है; वह जेट विमान की रफ्तार से महासागर पार करती है और साफ, धूप वाले दिन भी आ सकती है, जब आसपास कोई तूफान न हो।

बंगाल की खाड़ी में लहर कितनी ऊँची हो सकती है? प्रबल चक्रवातों में सबसे प्रभावित जगह पर कुछ मीटर की लहर सामान्य है, और 1970 जैसी चरम घटनाओं के ऐतिहासिक विवरण करीब दस मीटर तक बताते हैं। ऊपर से ऊँचा ज्वार और टूटती लहरें जोड़ दें, तो पानी अकेले लहर के आँकड़े से कहीं ऊपर पहुँच जाता है।

क्या अपने घर की ऊपरी मंजिल पर रुकना सुरक्षित है? लहर-क्षेत्र में नहीं। अधिकारी तय किए गए चक्रवात आश्रय में या भीतर की ओर जाने को कहते हैं, क्योंकि लहर का पानी मलबा साथ लाता है और उस पर टूटती लहरें साधारण घर की निचली मंजिल को तोड़ सकती हैं। स्थानीय निकासी आदेश का पालन करें।

लहर की चेतावनी कौन जारी करता है? भारत में IMD, बांग्लादेश में वहाँ का मौसम विज्ञान विभाग और पाकिस्तान में पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग।

तटीय शहरों का मौसम मैं कहाँ देखूँ? मौसम ऑनलाइन पर हवा, बारिश और घंटेवार पूर्वानुमान तट पर और तट के पास बसे शहरों के लिए मिलते हैं — कोलकाता, चेन्नई, भुवनेश्वर, मुंबई, कोच्चि और अहमदाबाद।

संबंधित शब्द

संबंधित शब्द

सभी शब्द