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तूफ़ान की आँख

परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात का शांत, अक्सर खुले आसमान वाला केंद्र, जिसे आँख की दीवार घेरे रहती है — और उसी दीवार में सबसे तेज़ हवा और सबसे भारी बारिश होती है। आँख ऊपर से गुज़रते समय छाने वाली अचानक शांति चक्रवात का अंत नहीं, उसका सबसे धोखेबाज़ पल है।

घटनाएँ

तूफ़ान की आँख क्या है?

उपग्रह से ली गई किसी प्रबल चक्रवात की तस्वीर में चमकते सफ़ेद बादलों का विशाल भँवर दिखता है, और उसके ठीक बीच में एक गहरा, लगभग गोल छेद। वही छेद तूफ़ान की आँख है। भीतर हवा हल्की बयार भर रह जाती है, बारिश रुक जाती है, और आसमान कभी-कभी इतना खुल जाता है कि दिन में सूरज और रात में तारे दिखें।

इस घेरे के चारों ओर आँख की दीवार खड़ी रहती है — ऊँचे उठे गरज-तूफ़ानों का छल्ला, जिसमें पूरे चक्रवात की सबसे तेज़ हवा और सबसे भारी बारिश सिमटी होती है।

आम आँख 20 से 65 किमी चौड़ी होती है। छोटे पर बेहद तीव्र तूफ़ान 15 किमी से संकरी “पिनहोल” आँख बना लेते हैं, जबकि बड़े, लंबे चलने वाले तंत्रों की आँख 100 किमी से ज़्यादा फैल सकती है।

हर उष्णकटिबंधीय चक्रवात में आँख नहीं बनती। उत्तरी हिंद महासागर में साफ़ आँख आम तौर पर तभी उभरती है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पैमाने पर तंत्र अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान बन चुका हो, यानी निरंतर हवा 118 km/h या उससे ऊपर हो। उपग्रह की तस्वीर में आँख का पहली बार उभरना उन संकेतों में से एक है जिनसे पूर्वानुमानकर्ता भाँपते हैं कि तूफ़ान ताक़त पकड़ रहा है।

घूमती दीवार के बीच नीचे बैठती गर्म हवा

चक्रवात ऊष्मा से चलने वाला इंजन है। गर्म समुद्र के ऊपर नम हवा चक्कर काटते हुए भीतर की ओर बढ़ती है, आँख की दीवार में ऊपर चढ़ती है, और उसकी जलवाष्प बादल व बारिश बनते समय भारी ऊष्मा छोड़ती है। चोटी पर पहुँचकर इस हवा का ज़्यादातर हिस्सा बाहर फैल जाता है, पर कुछ अंश बीचोंबीच वापस नीचे धकेल दिया जाता है।

नीचे उतरती हवा दबकर गर्म होती है, सूखती है और बादल घोल देती है। आँख के साफ़ रहने का राज़ यही है, और इसी कारण पूरे चक्रवात की सबसे गर्म हवा किनारों पर नहीं, भीतरी हिस्से में मिलती है।

तूफ़ान जितना तेज़ घूमे, भीतर आती हवा के लिए ठीक केंद्र तक पहुँचना उतना कठिन होता है: घूर्णन ऊपर उठने की क्रिया को एक ख़ास त्रिज्या के छल्ले तक बाँध देता है, और उसके भीतर छूटी हवा के पास नीचे उतरने के सिवा रास्ता नहीं बचता। चक्रवात जितना प्रबल हो, आँख के किनारे प्रायः उतने ही तीखे होते हैं।

दीवार का बदलना

बहुत तीव्र चक्रवात कभी-कभी बाहर की ओर एक दूसरी दीवार बना लेते हैं। यह बाहरी छल्ला भीतरी दीवार तक जाने वाली नमी रास्ते में ही रोक लेता है, भीतरी दीवार ढह जाती है, और नई, चौड़ी आँख के सिकुड़कर जमने तक तूफ़ान कुछ देर कमज़ोर पड़ता है। इस आँख की दीवार के प्रतिस्थापन चक्र के दौरान ताक़त का अनुमान एक-एक दिन तक उलझा रह सकता है, भले रास्ते का अनुमान बिलकुल ठीक चल रहा हो।

पारादीप से कच्छ तक: आँख वाले तूफ़ानों का रिकॉर्ड

पश्चिमी प्रशांत के मुक़ाबले उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवात कम बनते हैं, फिर भी इतिहास के कुछ सबसे प्रचंड और जानलेवा तूफ़ान यहीं से निकले — ख़ासकर बंगाल की खाड़ी से, जहाँ मई और अक्टूबर–नवंबर का गर्म, गहरा पानी नीचे बसे, घनी आबादी वाले डेल्टा तटों से आ मिलता है।

ओडिशा, अक्टूबर 1999. महा चक्रवात सुस्पष्ट आँख के साथ पारादीप के पास तट पार कर गया। इस बेसिन के सबसे ताक़तवर दर्ज चक्रवातों में इसकी गिनती होती है, और लगभग 10,000 जानें गईं।

फैलिन, अक्टूबर 2013. छोटी, धारदार आँख वाला यह सघन तूफ़ान ओडिशा में गोपालपुर के पास उतरा। क़रीब दस लाख लोग पहले ही हटा लिए गए थे, और मौतें पचास से नीचे रहीं।

फ़ानी, मई 2019. अत्यंत गंभीर श्रेणी का यह चक्रवाती तूफ़ान पुरी के पास तट से टकराया। ओडिशा ने फिर दस लाख से ज़्यादा लोगों को उसके रास्ते से हटाया।

अम्फान, मई 2020. खाड़ी के ऊपर महा चक्रवाती तूफ़ान की ताक़त छूने के बाद यह तट से पहले कमज़ोर हुआ और भारत–बांग्लादेश सीमा के पास सुंदरबन पर उतरा। उत्तरी हिंद महासागर में दर्ज सबसे महँगा चक्रवात यही है।

अरब सागर. ऐतिहासिक रूप से शांत रहे इस समुद्र के हाल के कुछ तूफ़ान इतने प्रबल निकले कि गुजरात पहुँचने से पहले उनकी आँख साफ़ बन चुकी थी — 2021 में ताउते दीव के पास तट पार कर गया, और 2023 में बिपरजॉय कच्छ में उतरा।

झूठी शांति: आँख के नीचे की सबसे जानलेवा भूल

जिस कस्बे के ऊपर से आँख गुज़रती है, वहाँ हवा की गर्जना कुछ मिनटों में लगभग सन्नाटे में बदल सकती है और बारिश थम जाती है। मान लेना स्वाभाविक लगता है कि तूफ़ान निकल गया — कोई नुक़सान देखने बाहर आता है, कोई मवेशी हटाने लगता है, कोई घर की ओर चल पड़ता है। पर आँख चक्रवात का अंत नहीं, उसका बीच है।

पीछे-पीछे दीवार का दूसरा छोर आता है — कभी कुछ मिनट बाद, कभी घंटे भर से ज़्यादा देर में — और उतनी ही प्रचंडता से टकराता है, बस अब हवा उलटी दिशा से बहती है। एक तरफ़ से चरमरा चुकी दीवारें, छतें और पेड़ दूसरी तरफ़ से टूटते हैं, और खुले में फँसा आदमी पूरी रफ़्तार से उड़ते मलबे की चपेट में आता है।

IMD, बांग्लादेश मौसम विज्ञान विभाग और इलाक़े के हर आपदा प्राधिकरण की सलाह एक है: चक्रवात के बीच अचानक सब शांत हो जाए, तो जिस आश्रय में हैं वहीं टिके रहिए, जब तक ख़तरा टलने की आधिकारिक घोषणा न हो।

पानी सबसे ऊँचा कहाँ चढ़ेगा, यह भी आँख से पता चलता है। सबसे ऊँची तूफानी लहर प्रायः वहीं आती है जहाँ आँख की दीवार तट पार करती है, उस तरफ़ जहाँ हवा समुद्र से ज़मीन की ओर बह रही हो — उत्तरी गोलार्ध में आम तौर पर तूफ़ान के रास्ते के दाईं ओर।

उपग्रह और तटीय रडार आँख को कैसे पकड़ते हैं

भूस्थिर उपग्रह, जिनमें भारत की इनसैट-3D श्रृंखला भी है, चक्रवात की तस्वीर हर कुछ मिनट से लेकर हर आधे घंटे पर उतारते हैं। तूफ़ान के केंद्र का सबसे सटीक निशान पूर्वानुमानकर्ताओं को आँख की स्थिति से ही मिलता है।

तट के क़रीब आने पर IMD के तटीय डॉप्लर रडार — चेन्नई, मछलीपट्टनम, विशाखापत्तनम, गोपालपुर, पारादीप और कोलकाता जैसे स्टेशनों पर — आँख की दीवार को सीधे देखने लगते हैं, और इन्हीं से तट पार करने की जगह व समय कुछ घंटों के दायरे में तय होते हैं। बांग्लादेश मौसम विज्ञान विभाग इसी काम के लिए अपने तटीय रडार चलाता है। आँख रडार की पहुँच में आते ही मॉडल के पूर्वानुमान की जगह तत्काल पूर्वानुमान कमान सँभाल लेता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चक्रवात की आँख कितनी बड़ी होती है? ज़्यादातर 20 से 65 किमी, हालाँकि दोनों छोरों पर अपवाद मिलते हैं। अकेले आकार से ताक़त का पता नहीं चलता — बेहद शक्तिशाली तूफ़ानों में बहुत छोटी और बहुत बड़ी, दोनों तरह की आँखें मिलती हैं।

आँख ऊपर से गुज़रे तो शांति कितनी देर टिकती है? यह आँख के व्यास और तूफ़ान की चाल पर निर्भर है। 30 किमी चौड़ी आँख 15 km/h से खिसके तो लगभग दो घंटे की शांति रहती है; वही आँख 30 km/h से चले तो क़रीब एक घंटे की। दोनों हालात में दीवार का दूसरा छोर बिना चेतावनी आ धमकता है।

क्या आँख चक्रवात का सबसे सुरक्षित हिस्सा है? सिर्फ़ इस संकरे अर्थ में कि उसके भीतर हवा हल्की रहती है। असल में यह सबसे धोखेबाज़ हिस्सा है: पूरे तूफ़ान की सबसे उग्र हवा उसी दीवार में होती है जो आँख को घेरे है, और जो आँख के नीचे है उसे बहुत जल्द दूसरी बार उस दीवार से होकर गुज़रना है।

क्या हर चक्रवात में आँख होती है? नहीं। अवदाब, गहरे अवदाब और ज़्यादातर चक्रवाती तूफ़ानों में आँख नहीं बनती; यह प्रायः अति गंभीर श्रेणी या उससे ऊपर दिखती है, और ठंडे पानी या ज़मीन पर कमज़ोर होते कई तूफ़ान इसे खो बैठते हैं।

अपने शहर की ओर बढ़ते चक्रवात पर नज़र कैसे रखूँ? पुरी, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, चेन्नई, कोलकाता और चटगाँव जैसे तटीय शहरों के पन्नों पर मौसम ऑनलाइन हवा की ताज़ा रफ़्तार, झोंके, बारिश और घंटे-दर-घंटे का पूर्वानुमान दिखाता है। चक्रवात के बीच बाहर की हवा अचानक थम जाए, तो उसे तूफ़ान का अंत मत मानिए — हो सकता है आँख ठीक ऊपर से गुज़र रही हो। आधिकारिक चेतावनी और निकासी के आदेश भारत में IMD और बांग्लादेश में बांग्लादेश मौसम विज्ञान विभाग देते हैं; किसी भी ऐप से ऊपर हमेशा उन्हीं की बात मानिए।

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