मौसम रडार का वह रूप जो बारिश की जगह के साथ उसकी बूँदों की रफ़्तार भी नापता है, और इसी से तूफ़ान की बनावट, उसका घुमाव और नीचे पटकती हवा दिखाई देती है। आज के मानसून पूर्वानुमान की रीढ़ यही रडार है।
पूर्वानुमानडॉप्लर रडार क्या है?
डॉप्लर मौसम रडार एक साथ दो सवालों का जवाब देता है: बारिश कहाँ हो रही है, और उसकी बूँदें रडार की ओर आ रही हैं या दूर जा रही हैं। इसका एंटेना सूक्ष्मतरंगों के स्पंद छोड़ता है — आमतौर पर एस-बैंड (2 से 4 GHz) या सी-बैंड (4 से 8 GHz) में — और बूँदों, ओलों या बर्फ़ से टकराकर लौटी गूँज सुनता है।
हर गूँज से दो पाठ्यांक मिलते हैं। परावर्तकता (dBZ) बताती है कि गूँज कितनी ज़ोरदार है, यानी बारिश कितनी भारी। त्रिज्यीय वेग (मीटर प्रति सेकंड) बताता है कि बूँदें रडार की सीध में कितनी तेज़ी से पास या दूर जा रही हैं। यह दूसरा पाठ्यांक लौटी तरंग के डॉप्लर विचलन से निकलता है, और रडार का नाम इसी पर पड़ा है।
वेग जुड़ते ही सिर्फ़ यह नहीं दिखता कि बारिश कहाँ है, बल्कि यह भी कि तूफ़ान के अंदर हवा कैसे चल रही है: चक्रवात की आँख, तेज़ गरज वाले तूफ़ान का घूमना, ऊपर से नीचे पटकती हवा (डाउनबर्स्ट), झोंकों का मोर्चा और हवा का एक जगह सिमटना।
दक्षिण एशिया में अगले कुछ घंटों के पूर्वानुमान का यही सबसे अहम औज़ार है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) 38 से ज़्यादा डॉप्लर रडार चलाता है, और मिशन मौसम (पहला चरण 2024–26, दूसरा चरण 2026–31) के तहत नए रडार लगाने की योजना है।
पास आता सायरन, दूर जाती बूँद: वेग कैसे पढ़ा जाता है
पास आती एम्बुलेंस का सायरन ऊँचे सुर में सुनाई देता है और बग़ल से निकलते ही सुर उतर जाता है। सूक्ष्मतरंग के साथ भी यही होता है: रडार की ओर बढ़ती बूँद से लौटी तरंग की आवृत्ति ज़रा-सी बढ़ जाती है, दूर भागती बूँद की घट जाती है। इस खिसकाव को डॉप्लर विचलन कहते हैं।
वेग-नक्शे पर तीन संकेत पढ़े जाते हैं:
- ऋणात्मक वेग — बूँदें रडार की ओर आ रही हैं।
- धनात्मक वेग — बूँदें रडार से दूर जा रही हैं।
- शून्य वेग — बूँदें किरण के आर-पार, समकोण पर चल रही हैं।
एंटेना हर कुछ मिनट में 360° घूमकर आमतौर पर 200 से 400 किलोमीटर त्रिज्या का घेरा छान लेता है। हर दिशा में वह एक स्पंद भेजता है और बारिश से लौटती गूँज का इंतज़ार करता है। अलग-अलग ऊँचाई-कोणों पर किए ऐसे चक्करों की परावर्तकता और वेग को जोड़कर घेरे के भीतर बारिश और हवा का त्रि-आयामी ढाँचा बनता है।
दोहरा ध्रुवीकरण: बूँद चपटी है या गोल, गिर रहा पानी है या ओला
2010 के बाद के आधुनिक डॉप्लर रडार एक साथ क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों तरह से कंपन करती तरंगें भेजते हैं। दोनों ध्रुवीकरणों से लौटी गूँजों के अनुपात से ये बातें पता चलती हैं।
बूँद की शक्ल। बड़ी बूँदें चपटी होती हैं और छोटी बूँदें गोल। दोनों गूँजों का अनुपात बता देता है कि सामने कैसी बूँदें हैं।
कण की किस्म। बारिश को ओलों, बर्फ़ और मिली-जुली वर्षा से अलग पहचाना जा सकता है।
कणों के आकार का बँटवारा। छोटे और बड़े कणों का अनुपात पता चलने से बारिश का अनुमान बेहतर होता है।
मलबे का निशान। बवंडर हवा में मलबा उठाता है, और उस मलबे की गूँज से बवंडर की पुष्टि हो सकती है।
IMD के कुछ नए रडार दोहरे ध्रुवीकरण वाले हैं, और इनसे चक्रवात तथा गरज के साथ तूफान की पहचान काफ़ी सुधरी है। ओले गिराने वाले तूफ़ान को सिर्फ़ बारिश वाले तूफ़ान से अलग पहचानना भी इसी से आसान हुआ है।
लोदी रोड से कॉक्स बाज़ार तक: किस रडार की नज़र किस इलाक़े पर
भारत। IMD के हर बड़े डॉप्लर मौसम रडार (DWR) के ज़िम्मे एक ख़ास इलाक़ा है। दिल्ली में लोदी रोड के मौसम भवन का रडार राजधानी क्षेत्र और सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा तथा राजस्थान को देखता है। मुंबई का रडार वेरावली में है और कोंकण तट की निगरानी करता है। कोलकाता का रडार बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों का पीछा करता है, और चेन्नई का पल्लीकरणई रडार तमिलनाडु के चक्रवातों तथा उत्तर-पूर्वी मानसून पर नज़र रखता है। विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर भी पूर्वी तट के चक्रवात देखते हैं।
भीतरी भारत में पटना और लखनऊ गंगा के मैदान के मानसून अवदाबों पर, और हैदराबाद तथा बेंगलुरु प्रायद्वीप पर नज़र रखते हैं। अहमदाबाद और भुज अरब सागर के चक्रवातों के लिए हैं; गोवा, कराईकल और मछलीपट्टनम तटीय पहरा देते हैं।
पाकिस्तान। PMD का कराची रडार (सदर) अरब सागर और सिंध तट देखता है, लाहौर का पंजाब के मैदान, और इस्लामाबाद का पोठोहार तथा ख़ैबर पख़्तूनख़्वा। सियालकोट में नया रडार है और मुल्तान में एक की योजना है।
बांग्लादेश। BMD के रडार कॉक्स बाज़ार (चक्रवात), ढाका (भीतरी इलाक़ा), खेपुपाड़ा (तट) और रंगपुर (उत्तर) में हैं। श्रीलंका में पुत्तलम का रडार अभी बन रहा है, और नेपाल में सुर्खेत का रडार इस जाल को आगे बढ़ाता है।
टकराने से पहले की नज़र, आधे घंटे की मोहलत: चेतावनी किसके काम आती है
तट। चक्रवात के रडार के घेरे में आते ही उसकी आँख, आँख की दीवार और बारिश की पट्टियाँ साफ़ दिखने लगती हैं। रास्ते और ताक़त का अनुमान हर 10 मिनट में ताज़ा होता है, और हवा के बारीक आँकड़ों से तूफानी लहर का अनुमान सुधरता है। दिसंबर 2023 में चक्रवात मिचौंग के ज़मीन से टकराने से पहले ही चेन्नई का रडार उसका पीछा कर रहा था।
बाढ़ वाले मैदान। बिना नाम वाले अवदाब भी रडार पर रहते हैं और भारी बारिश की आशंका उसी घड़ी आँकी जाती है — बिहार, बंगाल और ओडिशा की बाढ़ चेतावनियों के लिए यह निर्णायक है। रडार से आँकी गई बारिश बाढ़ मॉडलों, जलाशयों के प्रबंधन और नदी-बहाव के पूर्वानुमान में जाती है।
तेज़ आँधी-तूफ़ान। मानसून-पूर्व की नॉरवेस्टर आँधियाँ, जिन्हें कालबैसाखी कहते हैं, टकराने से 30 से 60 मिनट पहले पहचान ली जाती हैं। ओले वाले तूफ़ान सिर्फ़ बारिश वाले तूफ़ानों से अलग छाँटे जाते हैं और बवंडर पैदा कर सकने वाली सुपरसेल कोशिकाओं पर निशान लगता है।
उड़ानें। पायलट रडार पर दिखी ख़तरनाक कोशिकाओं से कतराकर निकलते हैं, हवाई अड्डे उतरने-उड़ने का फ़ैसला रडार देखकर लेते हैं, और वेग के आँकड़ों से पवन-कतरनी यानी हवा के अचानक बदलाव की चेतावनी जारी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक डॉप्लर रडार का घेरा कितना बड़ा होता है, और साफ़ तस्वीर कहाँ तक मिलती है? रडार से आमतौर पर 200 से 400 किलोमीटर की त्रिज्या तक। उसके आगे धरती की गोलाई के कारण रडार की किरण निचले स्तर पर हो रही बारिश के ऊपर से निकल जाती है। सबसे बारीक ब्योरा 100 किलोमीटर के भीतर के तेज़ तूफ़ानों का मिलता है।
मेरे मौसम ऐप में रडार का नक्शा क्यों नहीं दिखता? ज़्यादातर ऐप मॉडल वाला पूर्वानुमान दिखाते हैं, जो कई दिनों की योजना के काम आता है, जबकि रडार पर टिका तत्काल पूर्वानुमान अगले 1 से 2 घंटों के लिए होता है। दोनों ज़रूरी हैं; तत्काल पूर्वानुमान के लिए IMD के रडार वाले पन्ने देखिए।
क्या डॉप्लर रडार बवंडर पहले से भाँप सकता है? वह उन सुपरसेल तूफ़ानों को पहचान लेता है जिनमें घूमती हवा का निशान, यानी मेसोसाइक्लोन, दिखता है — बवंडर से पहले की अवस्था। दोहरे ध्रुवीकरण से उठा मलबा दिख जाए तो पुष्टि भी हो जाती है। बांग्लादेश के बवंडर-प्रवण नॉरवेस्टर इलाक़ों पर अब ज़्यादा बारीक नज़र है।
क्या भारत का हर कोना रडार की पहुँच में है? नहीं। पूर्वोत्तर के राज्य, मध्य भारत के कुछ हिस्से और हिमालय के दूर-दराज़ इलाक़े अब भी कम ढके हैं। मिशन मौसम (पहला चरण 2024–26, दूसरा चरण 2026–31) यह कमी दूर करने के लिए 87 नए रडार जोड़ना चाहता है।
रडार की ताज़ा तस्वीर और आने वाले घंटों की बारिश कहाँ मिलेगी? IMD की वेबसाइट (mausam.imd.gov.in) पर बड़े भारतीय शहरों की रडार छवियाँ सबके लिए उपलब्ध हैं, और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सचेत ऐप रडार पर आधारित आधिकारिक चेतावनियाँ भेजता है। मौसम ऑनलाइन कच्ची रडार छवि नहीं दिखाता, क्योंकि उसके लिए ख़ास तरह की रेंडरिंग चाहिए। पाकिस्तान में PMD और बांग्लादेश में BMD भी अपने रडार नक्शे जारी करते हैं। घंटेवार बारिश के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पटना और भुवनेश्वर के पृष्ठ देखिए।