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उष्णकटिबंधीय

कर्क रेखा (23.5° उत्तर) और मकर रेखा (23.5° दक्षिण) के बीच फैली पृथ्वी की वह पट्टी जहाँ सूर्य साल में कम से कम एक बार ठीक सिर के ऊपर आता है। दक्षिण एशिया का बड़ा हिस्सा इसी के उत्तरी आधे में बैठा है।

जलवायु

उष्णकटिबंध क्या है?

पृथ्वी के बीचोंबीच एक चौड़ी पट्टी ऐसी है जहाँ सूर्य साल में कम से कम एक दिन ठीक सिर के ऊपर आ खड़ा होता है। उसकी उत्तरी हद कर्क रेखा है — 23.5° उत्तर — और दक्षिणी हद मकर रेखा, 23.5° दक्षिण। बीच का यह 47° चौड़ा घेरा ही उष्णकटिबंध कहलाता है। पृथ्वी की सतह का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसमें आता है, और दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी भी यहीं बसती है।

दक्षिण एशिया के पाठक के लिए यह किताबी लकीर नहीं है। कर्क रेखा भारत के बीच से निकलती है — भुज, बांसवाड़ा (राजस्थान), भोपाल, जबलपुर, राँची और अगरतला के ऊपर से। इसके दक्षिण में जो कुछ है वह पूरी तरह उष्णकटिबंधीय है: मध्य प्रदेश से नीचे का लगभग समूचा भारत, दक्षिणी बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव।

पट्टी के भीतर कुछ बातें हर जगह साझा हैं — साल भर ऊँचा सौर विकिरण, तापमान में कम मौसमी उतार-चढ़ाव, चार ऋतुओं की जगह गीला और सूखा दो मौसम, तटों पर चक्रवात, और पृथ्वी के सबसे ऊँचे यूवी मान।

23.5° की लकीर कहाँ से आती है

यह संख्या किसी समिति ने तय नहीं की, सूर्य की चाल से निकली है। पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई है, और उसी झुकाव के कारण सीधी किरण साल भर उत्तर और दक्षिण के बीच घूमती रहती है। उसका सबसे उत्तरी ठिकाना कर्क रेखा बनता है, सबसे दक्षिणी मकर रेखा।

घेरे के भीतर बसे हर शहर को वह सीधी किरण मिलती है; बाहर, चाहे लंदन हो या मॉस्को, सूर्य कभी शीर्ष तक पहुँचता ही नहीं। उष्णकटिबंधीय जलवायु की पूरी इमारत इसी एक फ़र्क़ पर टिकी है।

एक ही पट्टी के भीतर चार अलग जलवायु

उष्णकटिबंध के भीतर भी बारिश हर जगह एक जैसी नहीं होती। जलवायु विज्ञानी उष्णकटिबंध को वर्षा के हिसाब से चार हिस्सों में बाँटते हैं:

प्रकारवर्षासूखा मौसमदक्षिण एशिया में कहाँ
वर्षावन (Af)हर महीने 60 मिमी से ऊपरनहींपश्चिमी घाट के हिस्से
मानसूनी (Am)साल में 1,500 मिमी से ऊपरएक छोटाकेरल, कोंकण तट, मुंबई
सवाना (Aw)700 से 1,500 मिमीसाफ़ और लंबामध्य भारत, दक्कन का पठार
मरुस्थल (BWh)250 मिमी से कमलगभग पूरा सालराजस्थान के हिस्से, पश्चिमी थार

फ़र्क़ कितना बड़ा है, यह दो शहरों से समझ आता है। मुंबई पर साल भर में 2,400 मिमी पानी गिरता है और जोधपुर पर 360 मिमी — और इन दोनों में तकनीकी रूप से उष्णकटिबंधीय सिर्फ़ मुंबई है।

उष्णकटिबंध भारत और दक्षिण एशिया में

पूरी तरह उष्णकटिबंधीय — केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना; दक्षिणी बांग्लादेश; श्रीलंका और मालदीव; महाराष्ट्र और गुजरात का तटीय हिस्सा।

आंशिक रूप से उष्णकटिबंधीय — मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल; कर्क रेखा इन्हीं के बीच से गुज़रती है।

उपोष्णकटिबंधीय — दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान; पाकिस्तानी पंजाब तथा ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के मैदान; नेपाल की तराई, भूटान और गिलगित-बाल्टिस्तान।

यही बँटवारा बताता है कि दक्षिण भारत का मौसम सिंधु-गंगा के मैदान जैसा क्यों नहीं चलता। उपोष्ण भारत में पश्चिमी विक्षोभ आते हैं और चार साफ़ ऋतुएँ बनती हैं; उष्णकटिबंधीय भारत में दो ही मौसम हैं — गीला मानसून और बाक़ी सूखा समय — बीच में ठंड की एक छोटी खिड़की।

मानसून, चक्रवात और नॉर्वेस्टर — पट्टी की अपनी मौसम-मशीन

एशियाई मानसून दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय मौसम-तंत्र है। ज़मीन और समुद्र के तापमान का अंतर उसे चलाता है, और आईटीसीज़ेड का उत्तर-दक्षिण खिसकना उसका समय तय करता है। भारत की सालाना बारिश का लगभग 75 प्रतिशत इसी एक तंत्र से आता है।

चक्रवात गरम समुद्र के बिना बनते ही नहीं — सतह का पानी कम से कम 26.5°C चाहिए, और यह शर्त इस पट्टी के बाहर शायद ही पूरी होती है। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर दोनों इसी में हैं, और प्रति व्यक्ति नुक़सान के लिहाज़ से बंगाल की खाड़ी दुनिया का सबसे घातक चक्रवात बेसिन मानी जाती है।

गरज-चमक भी यहीं सबसे घनी है; भूमध्य रेखा के पास तूफ़ान रोज़ का किस्सा हैं। बंगाल और बांग्लादेश पर मानसून से पहले उठने वाले नॉर्वेस्टर ख़ास तौर पर हिंसक होते हैं। अप्रैल से जून की लू रिकॉर्ड तोड़ती रही है, और यहाँ का वेट-बल्ब तापमान इंसानी सहनशीलता की हद के क़रीब पहुँचता रहा है। हवा का हिसाब भी उलटा-सीधा है: तेज़ धूप गर्मियों में ओज़ोन बनाती है, मानसून हवा धो देता है, सूखा मौसम प्रदूषण फिर जमा कर लेता है।

यूवी, गर्मी और मच्छर: इस पट्टी में रहने की सेहत-क़ीमत

सूर्य जितना ऊँचा, पराबैंगनी किरणें उतनी तीखी। यूवी सूचकांक इसीलिए अक्षांश के साथ सीधा गिरता है:

जगहअक्षांशशिखर यूवी सूचकांक
माले, मालदीव4° उत्तर14 या ऊपर
कोलंबो, श्रीलंका7° उत्तर14 या ऊपर
कोच्चि, केरल10° उत्तर13
चेन्नई13° उत्तर12–13
मुंबई19° उत्तर11–12
दिल्ली28° उत्तर9–10
लंदन51° उत्तर6–7
मॉस्को56° उत्तर5–6

टोपी, धूप का चश्मा और सनस्क्रीन इस पट्टी में शौक़ नहीं, बारहमासी ज़रूरत हैं।

बाक़ी ख़तरे मौसम के साथ करवट बदलते हैं: गर्मी में लू और पानी की कमी; मानसून में हैज़ा तथा टाइफ़ाइड जैसी जलजनित बीमारियाँ; लगभग साल भर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफ़ेलाइटिस; सूखे महीनों और सर्दियों की धुँध में साँस के संक्रमण; गरम-नम हवा में जल्दी ख़राब होता खाना; और बरसों जमा हुई धूप से त्वचा के कैंसर का बढ़ता जोखिम। बचाव सस्ता है — पानी पीते रहना, दोपहर में ठंडी जगह, मच्छरदानी, सनस्क्रीन और खाने की सफ़ाई।

जलवायु परिवर्तन इस पट्टी को पहले छूता है

जोखिम यहाँ औसत से ऊँचा है और एक साथ कई मोर्चों पर। गर्मी की हद पहले ही इंसानी सहनशीलता की सीमा से सटी है। समुद्र गरम होने के साथ चक्रवात तीखे हो रहे हैं। मानसून का मिज़ाज बदल रहा है — पानी कम दिनों में ज़्यादा, बीच के सूखे अंतराल लंबे। समुद्र का स्तर बढ़ने से मुंबई, कराची और चेन्नई जैसे तटीय शहर दबाव में हैं। हिमालय के वे ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं जिनसे इन नदियों को पानी मिलता है। खेती पर गर्मी, अनियमित बारिश और कीटों की तिहरी मार है। सेहत पर गर्मी से होने वाली मौतें और मच्छरजनित बीमारियों का फैलता दायरा।

इन सबके नीचे एक बात है: जलवायु के सामने सबसे कमज़ोर आबादी का बड़ा हिस्सा इसी पट्टी में रहता है — घनी बसावट, सीमित साधन, और मानसून तथा तटों की स्थिरता पर सीधी निर्भरता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कर्क रेखा भारत में कहाँ से गुज़रती है? मोटे तौर पर गांधीनगर से बांसवाड़ा (राजस्थान), भोपाल, जबलपुर और राँची होते हुए अगरतला तक। आठ राज्य इस लकीर पर पड़ते हैं — गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिज़ोरम।

क्या हर गरम जगह उष्णकटिबंधीय होती है? नहीं। परिभाषा तापमान से नहीं, अक्षांश से बनती है। फ़ीनिक्स (33° उत्तर) सख़्त गरम है पर उष्णकटिबंधीय नहीं, और हांगकांग (22° उत्तर) गरम भी है और उष्णकटिबंध की हद के ठीक भीतर भी। कसौटी सूर्य की ज्यामिति है।

एक ही पट्टी में बारिश इतनी अलग-अलग क्यों? क्योंकि वर्षा आईटीसीज़ेड की स्थिति, मानसूनी परिसंचरण और समुद्र की हालत पर टिकी है, और तीनों जगह तथा मौसम के साथ बदलते हैं। पश्चिमी घाट पर साल में 4,000 मिमी से ऊपर पानी गिरता है, जबकि थार रेगिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में 200 मिमी भी नहीं।

क्या जलवायु परिवर्तन उष्णकटिबंध पर ज़्यादा भारी पड़ेगा? कुछ मामलों में हाँ — गर्मी की हद पहले ही सहनशीलता के किनारे है और बारिश के बदलाव खेती को सीधे छूते हैं। कुछ में कम, क्योंकि आर्कटिक जैसे तापमान के बड़े झूले यहाँ नहीं आते। कुल असर फिर भी गंभीर है, घनी आबादी और सीमित साधनों की वजह से।

उष्णकटिबंधीय शहरों का मौसम कहाँ देखूँ? मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, हैदराबाद, कोलकाता और भुवनेश्वर के पन्ने इसी पट्टी का मौसम दिखाते हैं, और कर्क रेखा पर बैठे भोपाल पर दोनों तरफ़ का मिज़ाज एक साथ।

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