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लू

असामान्य रूप से गर्म मौसम का लंबा दौर, जो आमतौर पर कम से कम दो-तीन दिन लगातार चलता है। इसकी सही परिभाषा हर देश में अलग है।

घटनाएँ

लू क्या है?

लू उस दौर को कहते हैं जब किसी इलाके का तापमान वहाँ के सामान्य से काफ़ी ऊपर चला जाए और कम से कम दो-तीन दिन लगातार वहीं टिका रहे। नापने का तरीका हर देश का अपना है, पर साझा बात एक ही है — गर्मी वहाँ के लोगों की आदत से बाहर निकल जाए और सेहत, खेती या बुनियादी ढाँचे पर दबाव डालने लगे।

दक्षिण एशिया में यह अब सबसे जानलेवा प्राकृतिक आपदाओं में गिनी जाती है। मज़दूर और रेहड़ी वाले इसे किसी किताबी परिभाषा से नहीं, अपनी त्वचा से पहचानते हैं।

कागज़ पर लू: IMD का पैमाना और पड़ोस के अलग नियम

IMD दो कसौटियाँ रखता है, और लू घोषित होने के लिए दोनों का एक साथ पूरा होना ज़रूरी है।

पहली कसौटी सीधे तापमान की है — अधिकतम तापमान मैदानों में 40°C, तटीय इलाकों में 37°C या पहाड़ी इलाकों में 30°C तक पहुँच जाए।

दूसरी कसौटी सामान्य से बढ़त नापती है — उस तारीख के लंबी अवधि के औसत से अधिकतम तापमान 4.5 से 6.4°C ऊपर चला जाए।

इसके अलावा एक और रास्ता भी है — अगर असल में दर्ज अधिकतम तापमान 45°C या उससे ज़्यादा हो जाए, तो अकेले इतना ही लू मानने के लिए काफ़ी है। भीषण लू की घोषणा तब होती है जब तापमान 47°C पार कर ले, या सामान्य से बढ़त 6.5°C या उससे ज़्यादा हो जाए।

पड़ोसी देश अलग पैमानों पर चलते हैं। बांग्लादेश का BMD 36°C पर ही लू मान लेता है, और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक लू की परिभाषा आम तौर पर किसी एक वैश्विक तापमान से नहीं, बल्कि स्थानीय तापमान-सीमाओं से तय की जाती है। यही वजह है कि एक ही गर्म हफ़्ता ढाका में चेतावनी बन जाता है और जैसलमेर में सिर्फ़ एक और मई का दिन रह जाता है।

गर्म गुंबद, सूखी मिट्टी और थार से आती हवा

लू की जड़ में अक्सर एक ठहरा हुआ उच्च दाब क्षेत्र होता है, जिसे गर्म गुंबद कहते हैं। उच्च दाब हवा को नीचे की ओर धकेलता है, नीचे आती हवा दबाव में सिकुड़ती है और सिकुड़ने भर से गर्म हो जाती है। गुंबद के नीचे आसमान साफ़ रहता है, इसलिए दिन भर सूरज ज़मीन तपाता है, और सूखी हवा के कारण रात को भी ठंडक नहीं उतरती।

दक्षिण एशिया में तीन चीज़ें बार-बार मिलकर इसे विनाशकारी बना देती हैं:

लू भारत और दक्षिण एशिया में

भारत में लू का मौसम मार्च के आखिर से जून तक चलता है और मई में अपने चरम पर रहता है। नक्शे पर इसकी सबसे तीखी पट्टियाँ ये हैं:

35 डिग्री वेट-बल्ब: जहाँ पसीना काम करना छोड़ देता है

शरीर खुद को पसीने के सहारे ठंडा करता है — पसीना भाप बनकर उड़ता है और साथ में गर्मी ले जाता है। वेट-बल्ब तापमान 35°C तक पहुँचते ही यह पूरी व्यवस्था बैठ जाती है: पसीना ठीक से वाष्पित ही नहीं हो पाता, शरीर ठंडा नहीं हो पाता, और स्वस्थ वयस्क भी कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक से जान गँवा सकता है। अब तक गिने-चुने मौसम केंद्रों ने ही यह सीमा दर्ज की है, और वह भी थोड़ी देर के लिए — ज़्यादातर सिर्फ़ 1–2 घंटे। दक्षिण एशिया उन इलाकों में से एक है जहाँ ऐसी चरम नम गर्मी केंद्रित रहती है।

इससे नीचे के स्तर पर भी खतरे कम नहीं रहते:

लू के दिनों में क्या करें, क्या न करें

  1. सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच, यानी गर्मी के चरम घंटों में, बाहर निकलने से बचें।
  2. थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिएँ — दिन में कम से कम 3–4 लीटर, और बाहर काम करना हो तो इससे भी ज़्यादा।
  3. ORS घोल लें — 1 लीटर पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक।
  4. ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर ढककर रखें।
  5. पानी वाली चीज़ें खाएँ — तरबूज़, खीरा, लस्सी, छाछ और आम पन्ना।
  6. शराब, कैफ़ीन और मीठे पेय से दूरी रखें, ये शरीर का पानी और घटाते हैं।
  7. घर को ठंडा रखें — पर्दे बंद रखें और पंखे के सामने गीला तौलिया टाँग दें।
  8. आसपास के कमज़ोर लोगों की खबर लेते रहें, खासकर बुज़ुर्गों और अकेले रहने वालों की।

लू, 2026 और जलवायु परिवर्तन

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के एक अध्ययन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन ने भारत और पाकिस्तान में मार्च-अप्रैल 2022 की लू को औद्योगिक-पूर्व दौर के मुकाबले करीब 30 गुना ज़्यादा संभावित बना दिया। इसी लू ने भारत को 122 साल का सबसे गर्म मार्च दिया, और 2024 के मौसम ने दिल्ली-NCR में मई के नए रिकॉर्ड बना दिए।

2026 के लिए IMD ने 31 मार्च को अप्रैल-जून का जो पूर्वानुमान दिया, उसमें भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की बात थी, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में इसके सामान्य से ऊपर रहने की। जिन परिवारों के पास पंखे के अलावा ठंडक का कोई साधन नहीं है, उनके लिए सामान्य से ऊपर अधिकतम तापमान का सीधा मतलब है लंबी दोपहरें, जिन्हें चार दीवारों के भीतर काटना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में लू का मौसम कब रहता है? मुख्य मौसम अप्रैल से जून तक चलता है और उत्तर व मध्य भारत के लिए मई सबसे तीखा महीना होता है। जून के आखिर में दक्षिण-पश्चिम मानसून पहुँचते ही ज़्यादातर इलाकों में गर्मी टूट जाती है।

भारत में अब तक दर्ज सबसे ऊँचा तापमान कितना है? IMD का आधिकारिक रिकॉर्ड 19 मई 2016 को फलोदी (राजस्थान) में 51.0°C का है। पाकिस्तान के मोहनजोदड़ो में मई 2010 में 53.5°C दर्ज हुआ।

लू इतने लोगों की जान क्यों ले लेती है? कई वजहें एक साथ काम करती हैं — तीखी गर्मी, ऊँची नमी जो वेट-बल्ब तापमान को चढ़ा देती है, गरीब परिवारों के लिए ठंडक का कोई ढाँचा न होना, खुले में मज़दूरी, और दिल, गुर्दे व साँस की पहले से चली आ रही बीमारियाँ।

क्या ‘फ़ील्स लाइक’ तापमान और वेट-बल्ब तापमान एक ही चीज़ हैं? नहीं। ‘फ़ील्स लाइक’ यानी आभासी तापमान या हीट इंडेक्स आराम का पैमाना है, जो नमी और हवा को जोड़कर बताता है कि गर्मी कैसी महसूस होगी। वेट-बल्ब तापमान इसके उलट एक सख्त ऊष्मागतिकीय माप है — वह सबसे कम तापमान जहाँ तक हवा को वाष्पीकरण के ज़रिए ठंडा किया जा सकता है। 35°C का वेट-बल्ब सैद्धांतिक रूप से स्वस्थ इंसान के लिए भी जानलेवा माना जाता है।

आज मेरे शहर की गर्मी कहाँ देखूँ? मौसम ऑनलाइन पर हर भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शहर का ताज़ा तापमान, ‘फ़ील्स लाइक’ तापमान और AQI मिलता है — दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पटना, हैदराबाद।

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