शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाक़ों से 2 से 7°C तक ज़्यादा गर्म रहते हैं, क्योंकि कंक्रीट और डामर गर्मी सोखकर थामे रखते हैं और हरियाली कम होती है। दक्षिण एशिया के महानगरों के लिए यह बड़ा ख़तरा है।
घटनाएँआधी रात के बाद भी तपता शहर
गर्मियों में दिल्ली के किसी घने मोहल्ले में आधी रात के बाद भी दीवारें तवे की तरह तपती रहती हैं, जबकि शहर से बाहर खेतों के बीच बसे गाँव में उसी वक़्त हल्की ठंडक उतर आती है। इसी अंतर का नाम शहरी ताप द्वीप है: शहर अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से लगातार ज़्यादा गर्म बना रहता है। रात में यह फ़ासला आमतौर पर 2 से 7°C का होता है, दिन में 1 से 3°C का।
इस असर का पहली बार वर्णन 1818 में लंदन में हुआ था। गंभीर चिंता का विषय यह 21वीं सदी में बना, क्योंकि दुनिया भर के शहर, और ख़ास तौर पर दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के शहर, तेज़ी से फैल रहे हैं और अपने आसपास के देहात से ज़्यादा रफ़्तार से गर्म हो रहे हैं।
दिल्ली, मुंबई, कराची या ढाका जैसे महानगरों में रहने वालों के लिए इस शब्द का मतलब सीधे सेहत से जुड़ा है। लू चल रही हो तो शहर का केंद्र आसपास के ग्रामीण इलाक़े से 5°C तक ज़्यादा गर्म रह सकता है। जो तापमान पहले से ख़तरनाक है, वह इस अतिरिक्त गर्मी के साथ जानलेवा हद में पहुँच जाता है।
छह रास्ते जिनसे शहर गर्मी जमा करता है
शहर की अतिरिक्त गर्मी किसी एक वजह से नहीं, छह कारणों के जोड़ से बनती है: वह दिन में ज़्यादा धूप पकड़ता है, रात में जमा गर्मी धीरे-धीरे ही छोड़ पाता है, और ऊपर से ख़ुद गर्मी पैदा करता है।
धूप पकड़ने वाली सतहें। डामर की सड़क और कंक्रीट की छत अपने ऊपर पड़ने वाले सौर विकिरण का 80 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा सोख लेती हैं। गाँव की घास और खड़ी फ़सलें डामर और कंक्रीट के मुक़ाबले कम धूप सोखती हैं।
पत्तियों की ठंडक का ग़ायब होना। पौधे पत्तियों के रास्ते पानी को भाप बनाकर उड़ाते हैं, और इस वाष्पोत्सर्जन में आसपास की हवा की गर्मी ख़र्च होती है। शहर में हरियाली गिनी-चुनी है, सो यह मुफ़्त का कूलर लगभग बंद पड़ा रहता है।
रात में धीमी ठंडक। दिन भर कंक्रीट और डामर में भरी गर्मी रात को धीरे-धीरे रिसती है। सूरज डूबने के बाद शहर ग्रामीण इलाक़ों के मुक़ाबले धीमी रफ़्तार से ठंडा होता है।
इंसान की बनाई गर्मी। गाड़ियाँ, एयर कंडीशनर, कारख़ाने और ख़ुद इंसानों का शरीर सीधे शहर की हवा में गर्मी छोड़ते हैं। एसी कमरे को ठंडा करता है, पर उसकी बेकार गर्मी बाहर शहर की हवा में ही जाती है।
रुकी हुई हवा। ऊँची इमारतें ज़मीन के समानांतर बहने वाली हवा को रोकती और धीमा करती हैं, और गर्मी बहकर शहर से बाहर नहीं निकल पाती।
गली-घाटियाँ। ऊँची इमारतों के बीच की तंग सड़कें दीवारों से निकली गर्मी को अपने बीच फँसा लेती हैं और उसे आसमान की ओर निकलने नहीं देतीं। दोनों ओर ऊँची दीवारों वाली ऐसी सड़कों को इसी वजह से शहरी घाटियाँ कहा जाता है।
साफ़ और शांत रात में सबसे चौड़ी खाई
शहर और गाँव का फ़ासला पूरे दिन एक-सा नहीं रहता। असली खाई सूरज ढलने के बाद खुलती है, जब गाँव ठंडा होने लगता है और शहर की दीवारें दिन की जमा गर्मी उगलती रहती हैं। साफ़ आसमान और ठहरी हवा वाली रातों में यह खाई सबसे चौड़ी होती है, क्योंकि हवा चले तो शहर की गर्म हवा बहकर बिखर जाती है।
एक ही शहर के भीतर भी तस्वीर एक रंग की नहीं है। ज़मीन पर लगे मौसम केंद्रों से किए गए मापों के मुताबिक़ दिल्ली के घने व्यावसायिक इलाक़ों में शहर और गाँव का यह अंतर अपने शिखर पर 8.3°C तक पहुँच जाता है।
दिल्ली से ढाका तक: हर शहर का अपना ताप द्वीप
दक्षिण एशिया के महानगरों में हुए माप शहर-गाँव का अंतर बार-बार 3 से 7°C के बीच दिखाते हैं, पर समुद्र, नदी और बसावट की घनता हर शहर में इसे अलग रूप देती है।
घने बाज़ार और पुराने मोहल्ले। दिल्ली एनसीआर में कनॉट प्लेस और करोल बाग़ रात में ग्रामीण हरियाणा और उत्तर प्रदेश से 4 से 6°C गर्म रहते हैं। लाहौर के घने पुराने शहर और अनारकली में ताप द्वीप का असर गंभीर है, और गर्मियों का प्रभावी तापमान 50°C के पार पहुँचाने में उसका भी हिस्सा है।
समंदर किनारे के शहर। समुद्री हवा प्राकृतिक राहत है, बशर्ते वह शहर के भीतर तक पहुँच सके। मुंबई में तट से लगे इलाक़े समुद्री हवा की बदौलत भीतरी मुंबई से ठंडे रहते हैं, जबकि धारावी और सायन संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से 3 से 5°C ज़्यादा गर्म नापे गए हैं। कराची में घनी बसावट ने समुद्री हवा का भीतर घुसना कम कर दिया है। 2015 की लू में वहाँ 1,200 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी।
नदी वाला शहर। कोलकाता का केंद्रीय व्यापारिक इलाक़ा ग्रामीण ज़िलों से 4 से 6°C गर्म रहता है, लेकिन हुगली के किनारे-किनारे नदी इस असर को नरम कर देती है।
फैलते शहर। ढाका में अंतर 4 से 5°C का है और बढ़ता जा रहा है, क्योंकि शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है: संयुक्त राष्ट्र ने 2025 में इसे 3.7 करोड़ आँका। पुराना ढाका ख़ास तौर पर इसकी चपेट में है, जहाँ गलियाँ तंग हैं और चारों ओर कंक्रीट ही कंक्रीट है। बेंगलुरु में ताप द्वीप 3 से 5°C का है और शहर के फैलाव के साथ तेज़ी से बढ़ रहा है।
जून 2015 का कराची: जब लू जानलेवा बन गई
ताप द्वीप सिर्फ़ औसत तापमान में थोड़ी बढ़त नहीं जोड़ता, वह लू की मार को कहीं ज़्यादा तीखा कर देता है। जून 2015 की कराची की लू के दौरान लू लगने से 1,200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई, ज़्यादातर कराची में, और उनमें बहुत-से लोग बिना एसी वाली कम आमदनी की बस्तियों के थे।
शहरों में रहने वालों के लिए इसके मायने साफ़ हैं। लू लगने का ख़तरा सबसे ज़्यादा शहर के घने मोहल्लों में होता है। कम हरियाली, छोटे घर और कम हवादारी वाली ग़रीब बस्तियाँ अपने हिस्से से कहीं ज़्यादा नुक़सान उठाती हैं। शहर के बुज़ुर्ग और खुले में काम करने वाले, गाँव में रहने वाले अपने जैसे लोगों की तुलना में ज़्यादा दर से जान गँवाते हैं। इस गर्मी की सबसे सीधी मार उन शहरी लोगों पर पड़ती है जिनके पास एसी नहीं है।
गर्मी के पीछे-पीछे: हवा, बिजली, पानी और मच्छर
बढ़ा हुआ पारा अकेला नुक़सान नहीं है; ताप द्वीप शहर की कई दूसरी परेशानियाँ भी भड़काता है।
हवा की गुणवत्ता। ऊँचे तापमान पर ओजोन तेज़ी से बनती है। तापमान व्युत्क्रमण के ढक्कन के नीचे रुकी हवा PM2.5 को एक जगह गाढ़ा कर देती है, और दिल्ली की सर्दियों का स्मॉग कुछ हद तक रात में हवा की कमज़ोर आवाजाही से और बिगड़ता है।
बिजली। तापमान चढ़ते ही एसी का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ता है। दिल्ली की बिजली की चरम माँग 20 साल में तीन गुना हो गई है, और इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ ठंडक की ज़रूरत का है।
पानी। ज़्यादा गर्मी का मतलब है ज़्यादा भाप बनकर उड़ता पानी और सिंचाई की बढ़ी हुई ज़रूरत। शहरों का भूजल और तेज़ी से घटता है।
बीमारियाँ। गर्म शहरी पानी में मच्छर जल्दी पनपते हैं, जिससे डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते हैं। तेज़ गर्मी के दिनों में दिल और साँस की बीमारियाँ भी ज़्यादा उभरती हैं।
रोज़ी-रोटी। दोपहर के घंटों में निर्माण स्थलों, खुले बाज़ारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए काम चलाना पहले से ज़्यादा मुश्किल होता जा रहा है।
शहर को ठंडा करने के औज़ार: पेड़, सफ़ेद छत और हवा के गलियारे
सही जगह लगे पेड़ छाया और वाष्पोत्सर्जन से आसपास का तापमान 2 से 4°C तक घटा सकते हैं। दीवारों पर चढ़ाई गई हरियाली, घास या झाड़ियों वाली हरी छतें, और घने मोहल्लों के बीच छोटे-छोटे पार्क इसी सोच से निकले उपाय हैं।
सतह बदलना दूसरा बड़ा रास्ता है। सफ़ेद या चमकदार पेंट वाली ठंडी छत धूप का सोखना 50 से 80 प्रतिशत तक घटा देती है, और इस काम में अहमदाबाद अगुआ रहा है। हल्के रंग के डामर वाली ठंडी सड़कें और बारिश का पानी ज़मीन में उतारने वाले फ़र्श भी इसी श्रेणी में आते हैं।
नगर नियोजन में हवा के ऐसे गलियारे छोड़े जा सकते हैं जिनसे समुद्री हवा भीतर तक पहुँचे, गर्मी के लिहाज़ से नाज़ुक इलाक़ों में बसावट कम घनी रखी जा सकती है, और ऊँची इमारतों को सड़क से पीछे हटाकर ऊपर का आसमान खुला रखा जा सकता है। रोज़मर्रा के स्तर पर एसी की दक्षता के मानक बेकार गर्मी घटा सकते हैं, लू के दिनों में सार्वजनिक शीतलन केंद्र खोले जा सकते हैं, और खुले में होने वाले काम के घंटे बदले जा सकते हैं।
भारत में कई शहर अब इसे काग़ज़ पर भी उतार रहे हैं। अहमदाबाद 2013 में ताप कार्य योजना अपनाने वाला भारत का पहला शहर बना, और इस योजना में अब ताप द्वीप घटाने के उपाय भी जुड़ चुके हैं। हैदराबाद में तेलंगाना राज्य की ताप कार्य योजना ठंडी छतों के लक्ष्य तय करती है, दिल्ली की ताप कार्य योजना में वन और हरित आवरण बढ़ाने के लक्ष्य शामिल हैं, मुंबई की 2022 की जलवायु कार्य योजना में ताप द्वीप घटाना शामिल है, और बेंगलुरु ने C40 के कूल सिटीज़ एक्सेलरेटर के प्रति वचनबद्धता जताई है, जिसमें पेड़ों की छतरी बढ़ाना शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिल्ली ग्रामीण हरियाणा से कितनी ज़्यादा गर्म रहती है? साल भर के औसत में फ़र्क़ बस 1 से 2°C का है। लू के दिनों में यही फ़र्क़ 4 से 7°C तक फैल सकता है, ख़ासकर रात में, और साफ़ आसमान व शांत हवा में यह सबसे बड़ा रहता है।
क्या ताप द्वीप को उलटा जा सकता है? आंशिक रूप से। पेड़, ठंडी छतें, हरे खुले स्थान और कम कंक्रीट प्रभावित मोहल्लों में इसे 1 से 3°C तक घटा सकते हैं। पूरी तरह ख़त्म करने के लिए शहर की बुनियादी बनावट नए सिरे से गढ़नी पड़ेगी।
क्या जलवायु परिवर्तन इसे और बिगाड़ रहा है? हाँ। जलवायु परिवर्तन आधार तापमान को ऊपर खिसका रहा है और ताप द्वीप शहरों में उसे और चढ़ा देता है। यही जोड़ शहरी लू को साल-दर-साल ज़्यादा ख़तरनाक बना रहा है।
शाम ढलने के बाद गर्मी कितनी टिकी रही, यह कैसे परखूँ? ताप द्वीप की पहचान रात में होती है, इसलिए अपने शहर के मौसम ऑनलाइन पन्ने पर लाइव तापमान, अनुभव तापमान और AQI को एक बार शाम को और फिर देर रात देखिए, और मिलाइए कि बीच में पारा कितना उतरा। ध्यान रहे कि एक ही शहर के घने बाज़ार और मोहल्ले बाक़ी हिस्सों से भी ज़्यादा गर्म हो सकते हैं। शुरुआत इस लेख में आए शहरों से कीजिए: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद और हैदराबाद।