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मानसून के बाद का मौसम

अक्टूबर से दिसंबर तक का वह दौर जो दक्षिण-पश्चिम मानसून और सर्दी के बीच आता है। उत्तर भारत में यह सूखा और साफ़ रहता है, पर बंगाल की खाड़ी के लिए यही चक्रवातों का सबसे ख़तरनाक मौसम है।

घटनाएँ

मानसून के बाद का मौसम क्या है?

बरसात थमने और सर्दी जमने के बीच के लगभग तीन महीने, अक्टूबर से दिसंबर, मानसून के बाद का मौसम कहलाते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) साल को चार आधिकारिक हिस्सों में बाँटता है: जनवरी–फ़रवरी सर्दी, मार्च से मई मानसून से पहले का मौसम, जून से सितंबर दक्षिण-पश्चिम मानसून, और अक्टूबर से दिसंबर यह चौथा दौर।

देश के बड़े हिस्से में इन हफ़्तों का मिज़ाज सीधा-सादा है: बारिश घटती है, ठंड धीरे-धीरे उतरती है और आसमान खुल जाता है। इस मौसम को कैलेंडर से कम, उसकी घटनाओं से पहचानना ज़्यादा आसान है। गेहूँ की बुआई, दुर्गा पूजा और दिवाली के त्योहार, दिल्ली पर धुएँ की चादर, चेन्नई में बाढ़ और बंगाल की खाड़ी से उठते तूफ़ान की ख़बर, सब इसी दौर की तस्वीरें हैं।

गुलाबी ठंड वाली छवि के पीछे दो ऐसी बातें छिपी हैं जो इसे साल के बाक़ी महीनों से अलग, और कई बार जानलेवा, बनाती हैं। पहली, दक्षिण भारत के पूर्वी तट पर उत्तर-पूर्वी मानसून की बरसात। दूसरी, बंगाल की खाड़ी में ऐसे चक्रवात, जिनकी गिनती मानव इतिहास के सबसे घातक तूफ़ानों में होती है।

उलटी बहती हवा और गर्म पानी: इस मौसम के दो इंजन

अक्टूबर में जब देश का ज़्यादातर हिस्सा सूख रहा होता है, ठीक उसी समय प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर बारिश का एक अलग इंतज़ाम शुरू होता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के लौटते ही, जिसे मानसून की वापसी कहा जाता है, हवाएँ अपनी दिशा उलट लेती हैं और उत्तर-पूर्व से बंगाल की खाड़ी पार करती हुई बहने लगती हैं। खुले समुद्र के ऊपर ये नमी बटोरती हैं, और फिर दक्षिण भारत के पूर्वी तट और श्रीलंका पर उसे बरसा देती हैं। केरल के पूर्वी ढलानों को भी साल की मुख्य बारिश इसी से मिलती है। इसी व्यवस्था को उत्तर-पूर्वी मानसून कहते हैं।

सालाना बारिश में उत्तर-पूर्वी मानसून का हिस्सा इलाक़े के हिसाब से बदलता है:

दूसरा इंजन समुद्र का तापमान है। चक्रवात उत्पत्ति, यानी नए चक्रवात के बनने, के लिए सतह के पानी का कम से कम 26.5°C होना ज़रूरी है, और इन महीनों में खाड़ी 28–30°C पर टिकी रहती है, यानी यह शर्त आराम से पूरी हो जाती है। गर्म पानी अकेला काफ़ी नहीं होता, पर अक्टूबर–नवंबर में बाक़ी शर्तें भी एक साथ पूरी होने लगती हैं:

  1. मानसूनी हवाओं की ढील। तेज़ मानसूनी हवाएँ हवा की कतरनी (विंड शीयर) पैदा करती हैं, जो बनते तूफ़ान को चीरकर बिखेर देती है। ये हवाएँ कमज़ोर पड़ती हैं तो कतरनी घटती है और तूफ़ान को टूटे बिना बढ़ने का मौक़ा मिलता है।
  2. ऊपरी वायुमंडल का सहारा। ऊपर के हालात तूफ़ान के सीधे ऊपर की ओर बढ़ने के पक्ष में रहते हैं।
  3. मैडेन-जूलियन दोलन (MJO)। इन दो महीनों में इसके चरण अक्सर ऐसे बैठते हैं जो खाड़ी में तूफ़ान बनने में मदद करते हैं।

35 में से 26: खाड़ी के तूफ़ानों की तारीख़वार सूची

दर्ज इतिहास में दुनिया के 35 सबसे घातक चक्रवातों में से 26 बंगाल की खाड़ी में आए हैं, और उनमें से ज़्यादातर अक्टूबर–नवंबर में बने। इस मौसम के कुछ बड़े नाम:

फाइलिन और हुदहुद की तारीख़ एक ही है, बस साल अलग। यह संयोग याद दिलाता है कि ख़तरा नवंबर के चरम से पहले, अक्टूबर के बीच में भी दस्तक दे सकता है।

पंजाब के धुएँ से चेन्नई की झड़ी तक: हर इलाक़े का अलग चेहरा

एक ही महीना अलग-अलग राज्यों में बिलकुल अलग मौसम लेकर आता है।

उत्तर भारत — दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार। हवा सूखी, आसमान साफ़, और ठंडक धीरे-धीरे बढ़ती हुई। दिन का पारा 30°C से खिसककर 25°C के आसपास आ जाता है, रातें 20°C से उतरकर 12°C तक ठंडी होती हैं। शांत, ठहरी हवा जब पंजाब में पराली जलने से उठे धुएँ को थाम लेती है, तो नवंबर–दिसंबर के घने स्मॉग की ज़मीन तैयार हो जाती है।

मध्य भारत — मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में बरसात की आख़िरी बौछारें थमती हैं। उसके बाद सर्दी आने तक अक्टूबर और नवंबर सुहाने रहते हैं।

पूर्वी भारत — पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार। चक्रवातों की सीधी मार वाला इलाक़ा। कोलकाता में अक्टूबर से नवंबर के बीच तापमान 30°C से गिरकर 22°C तक पहुँचता है।

दक्षिण भारत — तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल। यहाँ यह सूखा मौसम नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्वी मानसून का गीला और अक्सर तूफ़ानी दौर है। चेन्नई में भारी बारिश नवंबर में चरम पर होती है। जब कोई चक्रवात इस मानसूनी बारिश के साथ आ मिले, तो बाढ़ का ख़तरा खड़ा हो जाता है।

बांग्लादेश। दक्षिण के तटीय ज़िलों पर अक्टूबर में चक्रवात का साया रहता है। ढाका का पारा धीरे-धीरे 30°C से 25°C की ओर उतरता है।

पाकिस्तान। कराची ज़्यादातर सूखा रहता है और वहाँ तापमान 35°C से 30°C की ओर आता है। उत्तर के पहाड़ों में ऊँची चोटियों पर साल की पहली बर्फ़ पड़ने लगती है।

रबी के खेत, ज़हरीली हवा और घूमने का मौक़ा

खेती। उत्तर भारत के किसान के लिए यह रबी की बुआई का समय है। गेहूँ अक्टूबर–नवंबर में खेत में जाता है, मध्य भारत में दालें, सरसों और चना बोए जाते हैं। तमिलनाडु की तस्वीर अलग है: वहाँ उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश धान और दालों को पालती है।

हवा। खेत का कैलेंडर उत्तर भारत की हवा पर भी असर डालता है। पंजाब में पराली जलने का धुआँ उस हवा में घुलता है जो कहीं जा ही नहीं रही, दिवाली के पटाखे प्रदूषण के चरम को और ऊपर ले जाते हैं, और नवंबर में दिल्ली का PM2.5 बार-बार 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के पार चला जाता है।

सफ़र। देश के ज़्यादातर हिस्से के लिए अक्टूबर–नवंबर घूमने का सबसे अच्छा समय है। बारिश से धुला आसमान, दिन में 25–30°C का आरामदेह तापमान, चारों ओर हरियाली, और ऊपर से दुर्गा पूजा, दिवाली और ईद-ए-मिलाद जैसे त्योहार।

चेन्नई: जिस बारिश पर प्यास टिकी है, उसी से बाढ़ भी

देश का चौथा सबसे बड़ा शहर इस मौसम की दोनों सच्चाइयाँ एक साथ जीता है। उत्तर-पूर्वी मानसून न आए तो चेन्नई को साल भर पानी की तंगी झेलनी पड़े। पर यही बारिश जब बेहिसाब बरसती है, तो शहर डूब भी सकता है।

2015 की बाढ़ में चेन्नई पर नवंबर महीने में कुल 1,049 mm पानी बरसा। 2020 में निवार ने तमिलनाडु का रुख़ किया। दिसंबर 2023 में मिचौंग आया, और यह आठ साल के भीतर शहर की तीसरी बड़ी बाढ़ थी। 2015 और 2023, दोनों ही घटनाएँ उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान घटीं।

शहर में रहने वालों के लिए सबक़ सीधा है। नवंबर–दिसंबर में भारी बारिश की चेतावनी को रोज़ की ख़बर समझकर न टालें। जब खाड़ी का कोई चक्रवात उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश से आ मिलता है, तब बाढ़ का ख़तरा बनता है, जैसा 2023 में मिचौंग के साथ हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IMD के हिसाब से यह मौसम ठीक-ठीक कब से कब तक है? अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का ज़्यादातर हिस्सा। विभाग औपचारिक तौर पर अक्टूबर–दिसंबर को मानसून के बाद का मौसम गिनता है। बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों के लिहाज़ से नवंबर सबसे भारी महीना है।

नवंबर के स्मॉग का दोष क्या सिर्फ़ पराली पर है? नहीं, चार चीज़ें एक साथ जुड़ती हैं: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना, ठहरी हुई शांत हवा के साथ तापमान व्युत्क्रमण, दिवाली के पटाखे, और घरों को गर्म रखने के लिए ईंधन का बढ़ता इस्तेमाल।

क्या अक्टूबर–नवंबर में दक्षिण भारत घूमने जाना ठीक है? भारत के ज़्यादातर हिस्सों के लिए यही घूमने का सबसे अच्छा मौसम है। लेकिन नवंबर में तमिलनाडु, दक्षिणी आंध्र प्रदेश और ओडिशा–बंगाल के तट पर चक्रवात का जोखिम रहता है। टिकट बुक करने से पहले IMD का पूर्वानुमान और उष्णकटिबंधीय चक्रवात से जुड़े बुलेटिन देख लें।

क्या खाड़ी में चक्रवात पहले से ज़्यादा बनने लगे हैं? कुल गिनती में ख़ास बढ़ोतरी नहीं हुई है। फ़र्क़ यह आया है कि उनमें से गंभीर और अति गंभीर श्रेणी तक पहुँचने वाले तूफ़ानों का अनुपात बढ़ गया है। जलवायु वैज्ञानिक इसे समुद्र की गर्म होती सतह से जोड़ते हैं।

चक्रवात की ख़बर हो या दिल्ली का धुआँ, ताज़ा हाल किस पन्ने पर मिलेगा? खाड़ी में तूफ़ान बनने की ख़बर आते ही तट के चेन्नई, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर या कोलकाता के पन्ने खोलें, जहाँ अभी का मौसम, AQI और चक्रवात की सलाह एक साथ दिखती है। नवंबर में जब उत्तर भारत धुएँ में घिरा हो, तब दिल्ली के पन्ने पर AQI देख लेना काम आता है।

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