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मानसून की वापसी

दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम का समापन, जब बारिश थमने लगती है और सूखा, साफ़ मौसम लौट आता है। यह सितंबर के मध्य में उत्तर भारत से शुरू होकर अक्टूबर के मध्य तक प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर तक पहुँचती है।

घटनाएँ

मानसून की वापसी क्या है?

मानसून की वापसी, जिसे मानसून की विदाई भी कहा जाता है, दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम का समापन है। इसे मानसून की शुरुआत की उलटी चलती फ़िल्म समझिए: बारिश थमती है, ज़मीन के पास की हवा में नमी घटती है, दक्षिण-पश्चिमी हवाएँ घूमकर उत्तर या उत्तर-पूर्व से बहने लगती हैं, और आसमान साफ़ होने लगता है।

भारत और पूरे दक्षिण एशिया के लिए यह बरसात से निकलकर मानसून के बाद वाले मौसम और फिर सर्दी में दाख़िल होने का दौर है। खेती के लिहाज़ से विदाई की तारीख़ उतनी ही अहम है जितनी शुरुआत की। आख़िरी दौर की बारिश धान, सोयाबीन और मक्का जैसी ख़रीफ़ फसलों के दाने पकने पर असर डालती है। समय पर विदाई गेहूँ, सरसों और चने की रबी बुआई का रास्ता खोलती है; देर से विदाई खड़े धान को ख़राब कर सकती है और रबी को पीछे धकेलती है; वक़्त से पहले विदाई जलाशयों और भूजल को अधूरा भरा छोड़ सकती है।

शुरुआत के उलट, वापसी किसी एक तारीख़ में नहीं निपटती; यह कई हफ़्तों तक देश के एक छोर से दूसरे छोर तक खिसकती चलती है।

लगातार पाँच सूखे दिन: IMD विदाई कैसे तय करता है

दो-चार दिन धूप निकल आना मानसून के जाने का सबूत नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) सुदूर उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की विदाई की शुरुआत 1 सितंबर के बाद ही घोषित करता है, और वह भी इन कसौटियों के आधार पर:

  1. बारिश का रुकना — उस इलाक़े में लगातार पाँच दिन तक।
  2. निचले वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का बनना — 850 hPa और उससे नीचे के स्तरों पर हवा में प्रतिचक्रवात का घेरा बन जाए।
  3. नमी में भारी गिरावट — जो उपग्रह के जलवाष्प-चित्रों और टेफ़ीग्राम में साफ़ दिखे।

इसके बाद विदाई की आगे की घोषणाएँ इलाक़ों की निरंतरता बनाए रखते हुए की जाती हैं: विदाई उन इलाक़ों तक बढ़ाई जाती है जहाँ नमी घट गई हो और पाँच दिन मौसम सूखा रहा हो। विभाग हर ज़िले की असल विदाई-तारीख़ दर्ज करता है और सितंबर–अक्टूबर में रोज़ एक प्रगति-नक्शा छापता है, जिस पर विदाई का आगे बढ़ना देखा जा सकता है।

द्रोणी, जेट और खाड़ी: विदाई के पीछे की हलचल

ज़मीन पर दिखने वाले बदलावों के पीछे वायुमंडल और समुद्र की पाँच हलचलें हैं, जो मानसून के हटने के साथ-साथ चलती हैं:

इसीलिए विदाई पूरे देश के लिए सूखे की ख़बर नहीं है: जैसे-जैसे उत्तर का आसमान खुलता है, तमिलनाडु की असली बरसात की बारी आती है।

उत्तर से दक्षिण: किस इलाक़े से मानसून कब विदा होता है

शुरुआत के समय मानसून दक्षिण से उत्तर की ओर चढ़ता है; वापसी ठीक उलटी चलती है, यानी सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान छूटता है और सबसे आख़िर में तमिलनाडु और केरल। औसत तारीख़ें:

इलाक़ाऔसत विदाई
पश्चिमी राजस्थान17 सितंबर
पंजाब, हरियाणा22 सितंबर
दिल्ली-एनसीआर25 सितंबर
उत्तर प्रदेश, बिहार1 अक्टूबर
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़5 अक्टूबर
महाराष्ट्र, ओडिशा10 अक्टूबर
कर्नाटक, तेलंगाना15 अक्टूबर
तमिलनाडु15–20 अक्टूबर, जिसके बाद उत्तर-पूर्वी मानसून
केरल15–20 अक्टूबर

पाकिस्तान के पूर्वी मैदानों से मानसून 10 से 20 सितंबर के बीच हटता है, लगभग उन्हीं दिनों जब पश्चिमी राजस्थान में विदाई दर्ज होती है। बांग्लादेश में यह घड़ी सितंबर के आख़िर से अक्टूबर की शुरुआत के बीच आती है।

पहली विदाई से प्रायद्वीप में आख़िरी विदाई तक का सफ़र लगभग 30 दिन का है। उस महीने देश दो हिस्सों में बँटा दिखता है: ऊपर खुलता आसमान, नीचे अब भी बादल और बारिश।

कटाई, सफ़र और शहर: विदाई की तारीख़ किसे क्या बताती है

किसान धान और सोयाबीन की कटाई अनुमानित विदाई के हिसाब से तय करें। सितंबर के आख़िर में कभी-कभी बारिश का “दूसरा दौर” आता है, जो खड़ी फसल को ज़मीन पर लिटा सकता है। विदाई की पुष्टि होते ही रबी के लिए खेत की तैयारी शुरू की जा सकती है।

घूमने वालों के लिए सितंबर के आख़िर से अक्टूबर के मध्य तक बदलाव की खिड़की है: उत्तर भारत खुलता है, तमिलनाडु और श्रीलंका भीगने लगते हैं। अक्टूबर–नवंबर, यानी मानसून के बाद का मौसम, देश के ज़्यादातर हिस्सों में सफ़र का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

शहरों के लिए यह बेफ़िक्री का दौर नहीं है। सितंबर के आख़िर की बादल फटने जैसी बारिश बड़े शहरी जलभराव ला चुकी है, जैसा पटना में 2019 में हुआ। नगर प्रशासन को इन हफ़्तों में IMD के बुलेटिन पर नज़र रखनी चाहिए।

देर से विदाई, अनियमित विदाई और जलवायु परिवर्तन

विदाई का अपने औसत से भटकना नई बात नहीं; हाल के कई सालों में मानसून देर से विदा हुआ है:

जलवायु परिवर्तन पर शोध बताते हैं कि विदाई पहले से ज़्यादा अनियमित हो रही है और कभी-कभी एक से दो हफ़्ते खिंच जाती है। विदाई से ठीक पहले, सितंबर के आख़िर और अक्टूबर की शुरुआत में, बादल फटने जैसी बौछारें बढ़ी हैं; बंगाल की खाड़ी का चक्रवात-मौसम साल में आगे तक खिंच रहा है; और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का आना नवंबर की ओर सरक रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिल्ली से मानसून कब विदा होता है? औसतन 25 सितंबर को। पर 1961 से अब तक यह तारीख़ 3 सितंबर (1982, सबसे जल्दी) से 17 अक्टूबर (2013, सबसे देर से) तक फैली रही है, इसलिए किसी एक साल की विदाई औसत से काफ़ी हटकर हो सकती है।

क्या विदाई के बाद बारिश बिल्कुल बंद हो जाती है? नहीं। “वापसी” का मतलब इतना है कि मानसून की संगठित हवा-व्यवस्था ख़त्म हो गई; उसके बाद भी इक्का-दुक्का बौछारें पड़ना सामान्य है।

तमिलनाडु में असली बारिश मानसून के जाने के बाद क्यों आती है? वहाँ का मुख्य बरसाती मौसम उत्तर-पूर्वी मानसून है, अक्टूबर से दिसंबर तक, जब हवाएँ पलटकर बंगाल की खाड़ी से नमी लाती हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून तटीय तमिलनाडु को बहुत कम भिगोता है, क्योंकि उसकी नम हवाओं को पहले पश्चिमी घाट पार करना पड़ता है, और तब तक उनकी ज़्यादातर नमी ख़र्च हो चुकी होती है।

क्या मानसून विदा होकर लौट सकता है? कम ही, पर हाँ। 2019 में विदाई इतनी देर से और इतनी बेतरतीब हुई कि कई राज्यों में अंतिम विदाई से पहले, अक्टूबर की शुरुआत में, बारिश के नए दौर आ गए।

अपने शहर में विदाई कैसे पहचानूँ? आधिकारिक घोषणा IMD के रोज़ के नक्शे पर होती है। मौसम ऑनलाइन के शहर-पृष्ठ पर अभी की बारिश और आगे का पूर्वानुमान दिखता है; जब आगे के कई दिनों में बारिश लगभग ग़ायब हो जाए, तो समझिए बरसात सिमट रही है। सितंबर–अक्टूबर में उत्तर से दक्षिण के क्रम में दिल्ली, लखनऊ, पटना, मुंबई और चेन्नई के पन्ने बारी-बारी खोलें, तो ऊपर वाले शहरों में बारिश पहले थमती और नीचे वाले शहरों में देर तक टिकी दिख सकती है।

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