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हिंद महासागर द्विध्रुव

हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच समुद्र-सतह के तापमान का झूला, जो भारतीय मानसून को बचा भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है, और पूर्वी अफ्रीका, इंडोनेशिया तथा ऑस्ट्रेलिया की बारिश भी बदल देता है।

घटनाएँ

हिंद महासागर द्विध्रुव क्या है?

2019 में प्रशांत महासागर में कमज़ोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई थी, और ऐसे सालों में भारत अक्सर कम बारिश की आशंका के साथ मानसून की राह देखता है। फिर भी उस बरस मानसून अधिशेष बारिश देकर लौटा। मदद हमारे अपने समुद्र से आई थी — हिंद महासागर द्विध्रुव, यानी IOD से।

IOD उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के दो छोरों के बीच समुद्र-सतह के तापमान का बार-बार लौटने वाला झूला है। पश्चिमी छोर अरब सागर और पूर्वी अफ्रीका के तट के सामने का पानी है, पूर्वी छोर इंडोनेशिया में सुमात्रा और जावा के किनारे का। धनात्मक चरण में पश्चिमी छोर गर्म और पूर्वी ठंडा रहता है, ऋणात्मक चरण में इसका उलटा; दो छोरों वाले इसी झूले को “द्विध्रुव” कहा जाता है। कुछ लोग इसे “भारतीय नीनो” भी कहते हैं।

जलवायु के नामी चक्रों में यह सबसे नए सदस्यों में है: साजी और उनके सहयोगियों ने 1999 में इसकी पहली औपचारिक पहचान की। उम्र कम होने के बावजूद दक्षिण एशिया, पूर्वी अफ्रीका, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के मौसमी पूर्वानुमानों में आज इसकी केंद्रीय भूमिका है। भारत के लिए इसका सबसे सीधा रिश्ता IMD के मानसून पूर्वानुमान से है, जिसमें अल नीनो के साथ-साथ IOD को भी गिना जाता है।

दो समुद्री खाने और एक घटाव: DMI से नाप

IOD की ताक़त एक संख्या बताती है — DMI, यानी द्विध्रुव मोड सूचकांक। इसके लिए समुद्र पर दो आयताकार खाने तय हैं:

दोनों खानों में समुद्र-सतह का तापमान अपने सामान्य स्तर से कितना हटा है, यह विचलन निकाला जाता है, और पश्चिमी विचलन में से पूर्वी विचलन घटा दिया जाता है। पश्चिम ज़रा ज़्यादा गर्म और पूरब ज़रा ज़्यादा ठंडा हो, तो दोनों अंतर जुड़कर सूचकांक को ऊपर उठा देते हैं। फ़ैसला यों होता है:

दहलीज़ सिर्फ़ 0.4°C की है, पर असर बड़ा। धनात्मक चरण में गर्म पश्चिमी पानी से ज़्यादा वाष्पीकरण होता है और मानसूनी हवा को ज़्यादा नमी मिलती है। निचले स्तर पर बहने वाली तेज़ हवा की धारा, सोमाली निम्न-स्तरीय जेट, भी मज़बूत होती है। ऋणात्मक चरण में यह आपूर्ति घट जाती है।

मानसून का रक्षक या बिगाड़ू: भारत में IOD का हिसाब

धनात्मक IOD भारतीय मानसून की बारिश बढ़ाने की ओर झुकता है, और ऋणात्मक IOD उसे घटाने की ओर। “झुकता है” पर ज़ोर ज़रूरी है: हर धनात्मक साल भरपूर बारिश की गारंटी नहीं।

असली वज़न तब दिखता है जब इसे प्रशांत के ईएनएसओ (ENSO) के बगल में रखा जाए:

1992 में ऋणात्मक IOD के साथ भारतीय मानसून कमज़ोर रहा। 2016 में प्रायद्वीपीय भारत में अगस्त की बारिश सामान्य से कम रही, और इसमें ऋणात्मक IOD का हाथ था; पर पूरा मौसम सामान्य रहा, जिसमें बारिश दीर्घ अवधि औसत (LPA) का 97% रही। 2023 बीच का मामला था: अल नीनो वाले उस साल अगस्त के आख़िर से धनात्मक IOD बना, और उसने मानसून की कमी की कुछ हद तक भरपाई की, पूरी तरह नहीं — मौसम LPA के 94% पर ख़त्म हुआ। पड़ोस में बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए भी धनात्मक IOD आम तौर पर मानसूनी बारिश के पक्ष में जाता है।

झूले के दोनों सिरे: पूर्वी अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक

झूले के दोनों सिरों पर बसे देशों पर इसका असर आपस में उलटा पड़ता है। पश्चिमी सिरे पर केन्या, तंज़ानिया, इथियोपिया और सोमालिया हैं। धनात्मक IOD में, जब गर्म पानी इनकी ओर वाले छोर पर होता है, यहाँ भारी बारिश और अक्सर बाढ़ आती है। 1961 में बहुत तीव्र धनात्मक IOD के साथ पूर्वी अफ्रीका में रिकॉर्ड बाढ़ आई थी। 1997 में तीव्र धनात्मक IOD रिकॉर्ड के सबसे तीव्र अल नीनो में से एक के साथ पड़ा और वहाँ फिर रिकॉर्ड बाढ़ आई; 2019 की पूर्वी अफ्रीकी बाढ़ भी इसी सिलसिले की है। ऋणात्मक चरण वहाँ सूखा लाता है, और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के अकाल अक्सर ऐसे ही वर्षों से मेल खाते रहे हैं।

पूर्वी सिरे पर इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया हैं, जहाँ तस्वीर पलट जाती है। धनात्मक IOD में इंडोनेशिया और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया सूखते हैं, और सुमात्रा तथा कालीमंतन की पीट-भूमि में आग के बड़े मौसम आते हैं; 1994 में यही हुआ, जब इंडोनेशिया सूखा और सुमात्रा जली। ऋणात्मक चरण इंडोनेशिया को भिगोता है और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में सर्दी और वसंत की बारिश को औसत से ऊपर ले जाता है — 2010 के तीव्र ऋणात्मक IOD वाले साल ऑस्ट्रेलिया ने बाढ़ झेली।

मानसून का अनुमान पढ़ते समय IOD को कैसे देखें

IMD अपने मौसमी पूर्वानुमान में IOD को कई चालकों में से एक गिनता है, इसलिए मानसून के अनुमान की ख़बर पढ़ते समय इस पर भी नज़र डालना काम का है। ऊपर की बातों से तीन सबक़ निकलते हैं:

  1. अकेले “अल नीनो” सुनकर नतीजा न निकालें। धनात्मक IOD अल नीनो का दबाव काट सकता है और सूखे की ओर जाते मानसून को बचा सकता है, इसलिए दोनों संकेत साथ पढ़ें।
  2. अल नीनो और ऋणात्मक IOD साथ दिखें तो सबसे ज़्यादा चौकन्ने रहें। यह जोड़ी अल नीनो वाले सूखे को और गहरा कर सकती है, यानी बुरा साल और बुरा हो सकता है।
  3. ENSO तटस्थ हो, तब भी पूरी तसल्ली न करें। IOD घटनाएँ कभी-कभी तटस्थ या कमज़ोर ENSO के साथ भी होती हैं, और ऋणात्मक IOD एक सामान्य दिखते साल को भी पटरी से उतार सकता है।

छोटी मोहलत वाला पूर्वानुमान, और गर्म होती दुनिया में IOD

ENSO के मुक़ाबले IOD को पहले से भाँपना कठिन है, क्योंकि यह तेज़ी से बनता है, अगस्त से अक्टूबर के बीच चरम छूता है और देर तक टिकता नहीं। इसके पूर्वानुमान की क्षमता सुधर रही है, पर 3 महीने से आगे के अनुमानों में अब भी सीमित है। IMD, ऑस्ट्रेलिया का मौसम ब्यूरो (BoM) और ECMWF, तीनों इसके आउटलुक जारी करते हैं। सबसे ज़्यादा नज़र मई–जून वाले अद्यतन पर रहती है, क्योंकि मानसून से ठीक पहले IMD अपने मौसमी पूर्वानुमान में IOD को कई चालकों में से एक गिनता है।

जलवायु परिवर्तन को लेकर मॉडल तीन बातें कहते हैं: तापवृद्धि के साथ धनात्मक IOD ज़्यादा बार आ सकते हैं, चरणों के बीच के झूले ज़्यादा चरम हो सकते हैं, और कुछ परिदृश्यों में अल नीनो से इसका रिश्ता गहरा हो सकता है। दक्षिण एशिया के लिए यह मिली-जुली ख़बर है: ज़्यादा धनात्मक वर्ष मानसून के पक्ष में जा सकते हैं, पर चरम धनात्मक घटनाएँ पूर्वी अफ्रीका की बाढ़ और इंडोनेशिया की आग से भी जुड़ी पाई गई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IOD और अल नीनो में क्या फ़र्क़ है? अल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर की घटनाएँ हैं, IOD हिंद महासागर की। आँकड़ों में दोनों का रिश्ता दिखता है, फिर भी कोई एक दूसरे के बिना घट सकता है। IOD को हिंद महासागर का अपना ENSO कह सकते हैं, बस इसकी समय-सीमा छोटी है।

एक IOD घटना कितने समय चलती है? आम तौर पर 4 से 6 महीने। यह मई–जून में आकार लेती है, सितंबर–अक्टूबर में शिखर पर होती है और दिसंबर तक ढल जाती है।

क्या धनात्मक IOD अल नीनो के बावजूद अच्छा मानसून दे सकता है? हाँ, 2019 इसकी किताबी मिसाल है। कमज़ोर से मध्यम अल नीनो सामान्यतः मानसून को दबाता, पर तीव्र धनात्मक IOD ने अधिशेष बारिश दिला दी। दोनों महासागरों की यही खींचतान पूर्वानुमान को पेचीदा बनाती है।

इस समय IOD किस चरण में है? ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो (BoM) के 13 अक्टूबर 2026 के जलवायु-चालक अद्यतन के अनुसार IOD अभी भी तटस्थ है, पर दक्षिणी गोलार्ध के वसंत के दौरान धनात्मक IOD बनने की संभावना है। IOD घटनाएँ कुछ ही महीनों में बनती और ढलती हैं, इसलिए आज की स्थिति IMD या BoM के नए अद्यतन में देखें।

मेरे शहर की बारिश में IOD का असर कहाँ दिखेगा? IOD की बात मौसम भर की बारिश के संदर्भ में होती है। रोज़ की तस्वीर के लिए मौसम ऑनलाइन के शहर-पन्ने अभी की बारिश और आगे का पूर्वानुमान दिखाते हैं: मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली। पूरे मौसम का अनुमान हमारी मानसून 2026 गाइड में है।

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