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स्लीट

बर्फ़ के छोटे, पारभासी दाने जो ज़मीन से टकराकर उछलते हैं — जमी हुई बारिश की बूँदें, या पिघलकर दोबारा जमी बर्फ़। हिमालय के सर्द तूफ़ानों में यह उस पट्टी में गिरता है जहाँ बारिश बर्फ़ में बदल रही होती है।

मूल बातें

स्लीट क्या है?

कश्मीर या हिमाचल के किसी सर्द दिन आसमान से काँच जैसे नन्हे दाने गिरने लगें, जो ज़मीन छूते ही उछल जाएँ, तो समझिए कि ये न आपस में चिपकने वाले बर्फ़ के नरम फाहे हैं, न गरज वाले तूफ़ानों के ओले। यही स्लीट है: बर्फ़ के नन्हे, पारभासी दाने, जिनका व्यास आमतौर पर 2–5 मिलीमीटर रहता है और जो ज़मीन छूते ही गेंद की तरह उछल जाते हैं। कुछ वर्गीकरण इन्हें सीधे हिम-गुलिकाएँ कहते हैं।

इसे बर्फ़बारी समझ लेना भूल होगी, क्योंकि मौसम विज्ञान की नज़र में स्लीट बर्फ़ से अलग चीज़ है। उसकी पहचान उसकी बनावट की कहानी में छिपी है — पहले जमना, फिर पिघलना, फिर दोबारा जमना। यही कहानी उसे बर्फ़, ओलों, ग्रॉपेल और जमती बारिश से अलग करती है, जिनका फ़र्क़ नीचे एक-एक करके दिया गया है।

दक्षिण एशिया में स्लीट न रोज़ की चीज़ है, न अजूबा। सर्दियों के पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों पर बरसते हैं तो ज़्यादा ऊँचाई पर पूरी बर्फ़ गिरती है और कम ऊँचाई पर पूरी बारिश। दोनों के बीच एक पट्टी बचती है, जहाँ गिरता पानी तय नहीं कर पाता कि उसे क्या बनना है। स्लीट उसी पट्टी का मौसम है।

ठंड, गरमाहट, फिर ठंड: तीन मंज़िला हवा में एक दाने का सफ़र

स्लीट के लिए हवा का तापमान ऊपर से नीचे तक एक ख़ास क्रम में बँटा होना चाहिए। गिरते हुए एक कण की यात्रा पाँच पड़ावों में देखिए:

  1. ऊँचे, ठंडे बादल में बर्फ़ बनती है। सर्दियों के बादलों में यह सामान्य बात है।
  2. फाहा नीचे एक गरम परत में घुसता है, जहाँ तापमान 0°C से ऊपर है। यहाँ वह आधा या पूरा पिघल जाता है।
  3. पिघली बूँद ज़मीन के पास वाली उस परत में उतरती है जो हिमांक से नीचे है।
  4. सतह तक पहुँचने से पहले वह दोबारा जमकर ठोस दाना बन जाती है।
  5. दाना ज़मीन से टकराकर उछलता है — स्लीट आ पहुँचा।

बीच वाली गरम परत आमतौर पर 100 से 1000 मीटर मोटी होती है, और नतीजा बहुत कुछ परतों की मोटाई पर टिका है। परत ज़रूरत से मोटी निकली, तो बर्फ़ पूरी पिघल जाती है और नीचे सादी बारिश पहुँचती है। ज़मीन के पास की ठंडी परत बहुत पतली रही, तो पिघली हुई बूँदों को ज़मीन तक पहुँचने से पहले दोबारा जमने की मोहलत नहीं मिलती और वे जमती बारिश बनकर गिरती हैं।

तापमानों की इतनी तंग खिड़की की वजह से स्लीट अपेक्षाकृत कम दिखता है। फिर भी हिमालय के सर्द तूफ़ानों में यह खिड़की बार-बार खुलती है।

श्रीनगर से शिलांग तक: बीच की ऊँचाइयों का मौसम

स्लीट की असली ज़मीन मध्यम ऊँचाई वाले इलाक़े हैं, जैसे कश्मीर की तलहटी में 1,200 से 2,000 मीटर वाली पट्टी। सर्दियों में यह कभी-कभार ही गिरता है, और जब गिरता है तो ज़्यादातर इन्हीं जगहों पर।

जहाँ सबसे ज़्यादा पड़ता है:

जहाँ दुर्लभ है, पर दर्ज हुआ है:

उष्णकटिबंधीय दक्षिण भारत, बांग्लादेश का डेल्टा, श्रीलंका और मालदीव इस सूची से बाहर हैं। वहाँ स्लीट नहीं दिखता, क्योंकि ये इलाक़े इसके लिए बहुत गरम हैं।

छोटे दाने, लंबी फिसलन: सड़क, पगडंडी और बाग़

स्लीट बर्फ़ जितनी तेज़ी से ढेर नहीं लगाता, लेकिन पीछे बर्फ़ीली, चिकनी सतह छोड़ जाता है।

सड़कें। डामर पर फिसलन की परत बहुत जल्दी चढ़ती है, और मनाली–लेह, श्रीनगर–जम्मू तथा काराकोरम हाईवे जैसे पहाड़ी रास्ते जोखिम भरे हो जाते हैं। गाड़ी को रुकने में जितनी दूरी लगती है, वह सूखी सड़क के मुक़ाबले गीली सड़क पर कम से कम दोगुनी हो जाती है, और बर्फ़ जमी सड़क पर दस गुना तक बढ़ सकती है।

पैदल चलना। फ़ुटपाथ और पगडंडियाँ चिकनी हो जाती हैं। कश्मीर और हिमाचल में स्लीट वाले दिनों में फिसलकर गिरना और चोट खाना आम है, इसलिए फिसलन-रोधी तले वाले जूते पहनिए।

बिजली और घर। इतनी परत आमतौर पर नहीं जमती कि बिजली के तार टूट जाएँ; भारी बर्फ़ या जमती बारिश से यही बड़ा फ़र्क़ है। पर स्लीट के बाद ठंड टिकी रहे, तो छतों और छज्जों से लटकती बर्फ़ की नुकीली छड़ें टूटकर नीचे गिर सकती हैं।

खेती। दाने जमकर परत बना लें तो सर्दियों की नाज़ुक फ़सलों को चोट पहुँच सकती है। भारी स्लीट के साथ बर्फ़ भी गिरे, तो पॉलीहाउस का आवरण वज़न से ढह सकता है।

हवाई सफ़र। उड़ानों को स्लीट से सीधी दिक़्क़त कम ही होती है, पर जो हालात स्लीट बनाते हैं उनमें ऊँचाई पर विमान पर बर्फ़ जमने का ख़तरा अक्सर रहता है, और वाताग्र के पहुँचने से पहले हवा में उथल-पुथल भी आम है।

ओला, ग्रॉपेल या स्लीट: दानों का फ़र्क़

आसमान से गिरने वाले ये रूप बनने के तरीक़े, आकार, रंग-रूप और मौसम के हालात में एक-दूसरे से अलग हैं:

यह पहचान किताबी नहीं है: बिजली की लाइनों और सड़कों के लिए सबसे ख़तरनाक जमती बारिश है, ओले फ़सल, गाड़ियों और छतों को नुक़सान पहुँचा सकते हैं, और ग्रॉपेल से बड़ी मुसीबत शायद ही कभी खड़ी होती है।

पूर्वानुमान की पतली रेखा, और घर की तैयारी

स्लीट का पूर्वानुमान कठिन है, क्योंकि सब कुछ ऊर्ध्वाधर तापमान की एक पतली खिड़की पर टिका है। मौसम मॉडल पूरे तूफ़ान को, और वर्षा किस रूप में गिरेगी इसके मोटे अंदाज़े को, तो पकड़ लेते हैं, पर अक्सर ठीक वह ऊँचाई चूक जाते हैं जहाँ बारिश स्लीट में और स्लीट बर्फ़ में बदलती है। सर्दियों के तूफ़ान से पहले पूर्वानुमान पर नज़र रखिए। उसमें मिली-जुली वर्षा या बारिश-बर्फ़ के मिश्रण की बात हो, तो स्लीट की आशंका समझिए, और तूफ़ान के बीच रूप बदलने के लिए तैयार रहिए।

स्लीट की चेतावनी मिले, तो घर के लिए इसका मतलब है 24 से 48 घंटे का राशन, पानी और कंबल, चार्ज किए हुए फ़ोन, और बिजली, सड़क-सफ़ाई तथा अस्पताल के नंबर हाथ के पास। घर के आसपास का ढीला सामान बाँध दें, क्योंकि जमी बर्फ़ की परत का वज़न उसे नीचे गिरा सकता है, और मवेशियों तथा पालतू जानवरों को गरम आसरा दें। पहाड़ी सड़क पर निकलना टल सके तो टालें; न टले तो सर्दियों का पूरा साज़ो-सामान और टायरों की ज़ंजीरें साथ रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या स्लीट और ओले एक ही चीज़ हैं? नहीं। ओले ज़्यादातर गर्म मौसम के गरज वाले तूफ़ानों में बनते हैं, जब दाना कपासी वर्षा मेघ के भीतर बार-बार ऊपर-नीचे घूमता है। वे बड़े, सख़्त और अक्सर परतदार होते हैं। स्लीट सर्दी की देन है: आधी पिघली बर्फ़ फिर जमती है और छोटे, पारभासी दाने बनते हैं।

स्लीट कितनी देर में पिघल जाता है? ज़मीन 0°C से गरम हो तो कुछ मिनटों से लेकर घंटे भर में। ज़मीन हिमांक से नीचे हो तो दाने घंटों, बल्कि कई दिनों तक पड़े रह सकते हैं, और तूफ़ान थमने के बाद भी जगह-जगह बर्फ़ीले धब्बे छोड़ जाते हैं।

बारिश और बर्फ़ के मुक़ाबले स्लीट कम क्यों दिखता है? उसे तीन परतें एक साथ चाहिए — ऊपर ठंड, बीच में गरमाहट, ज़मीन के पास फिर ठंड। पूरी तरह ठंडा स्तंभ (बर्फ़) या पूरी तरह गरम स्तंभ (बारिश) बनना इस ढाँचे से कहीं आसान है।

क्या स्लीट से गाड़ी को नुक़सान होता है? आमतौर पर नहीं, क्योंकि दाने छोटे हैं और टकराकर उछल जाते हैं। असली ख़तरा पीछे छूटी जमी सतह है, जो तेज़ रफ़्तार पर टायरों को नुक़सान पहुँचा सकती है और हादसे करा सकती है। भारी स्लीट के साथ जमती बारिश भी हो, तो सामने का शीशा चटक सकता है और गाड़ी की खिड़कियों के शीशे टूट सकते हैं।

मैदान के जिन शहरों में स्लीट कभी-कभार दर्ज हुआ है, उनका पूर्वानुमान कहाँ देखूँ? ऊपर गिनाए गए दुर्लभ मामलों में से अमृतसर मौसम ऑनलाइन पर अपने पन्ने के साथ मौजूद है, और वहाँ वर्षा का पूर्वानुमान रहता है। अमृतसर में स्लीट असाधारण पश्चिमी विक्षोभों के दौरान दर्ज हुआ है। ऐसे दिनों में इस पन्ने पर तापमान और वर्षा को साथ-साथ पढ़िए।

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