हवा का अचानक और तीखा दौर — आमतौर पर 60–120 km/h — जो कुछ मिनट से एक घंटे तक टिकता है और प्रायः गरज वाले तूफ़ान के अधोप्रस्फोट से आता है। मानसून-पूर्व की काल बैसाखी में सबसे आम।
घटनाएँझंझावात क्या है?
अप्रैल की किसी शाम कोलकाता या पटना में आसमान पश्चिम की ओर से काला पड़ता है, दस मिनट के भीतर हवा इतनी तेज़ हो जाती है कि टीन की छतें उड़ने लगती हैं, और फिर सब उतनी ही तेज़ी से शांत हो जाता है। मौसम विज्ञान इसी छोटे लेकिन हिंसक दौर को झंझावात कहता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने इसकी औपचारिक परिभाषा तीन शर्तों से बाँधी है, और तीनों एक साथ पूरी होनी चाहिए:
- हवा की गति में अचानक कम से कम 16 नॉट (30 km/h) की बढ़ोतरी
- चरम पर कम से कम 22 नॉट (40 km/h) की टिकी हुई गति
- कम से कम एक मिनट की अवधि
यही शर्तें इसे हवा के साधारण झोंके से अलग करती हैं। झंझावात की शुरुआत साफ़ पहचानी जा सकती है और यह लगभग 1 से 60 मिनट के भीतर ख़त्म हो जाता है। इसका सामान्य स्रोत गरज वाले तूफ़ान का अधोप्रस्फोट है — गिरती बारिश के वाष्पन से ठंडी और भारी हुई हवा नीचे की ओर दौड़ती है और ज़मीन से टकराकर चारों ओर फैल जाती है। इसी ठंडी हवा के फैलाव का अगला किनारा झंझावात कहलाता है।
दक्षिण एशिया में यह सबसे ख़तरनाक मानसून-पूर्व मौसम में होता है, यानी मार्च से मई के बीच, जब यह उन उग्र तूफ़ानों के भीतर आता है जिन्हें बंगाल और बिहार में काल बैसाखी और अंग्रेज़ी मौसम-शब्दावली में नॉरवेस्टर कहा जाता है।
बारिश के भीतर बनी ठंडी हवा ज़मीन पर कैसे फैलती है
एक सामान्य झंझावात छह सीढ़ियों से गुज़रता है:
- दोपहर के संवहन से कपासी वर्षा मेघ खड़ा होता है। 50–100 km/h की ऊर्ध्वधाराएँ नमी को ऊपर ले जाती हैं।
- तूफ़ान के केंद्र में बारिश शुरू होती है। गिरती बूँदें आंशिक रूप से भाप बनती हैं और आसपास की हवा को ठंडा कर देती हैं।
- ठंडी अधोधारा बनती है। आसपास की हवा से भारी होने के कारण यह 40–100 km/h की रफ़्तार से नीचे गिरती है।
- अधोप्रस्फोट ज़मीन से टकराता है। ठंडी हवा और नीचे नहीं जा सकती, इसलिए तेज़ी से क्षैतिज दिशा में फैलती है।
- इस फैलाव का अगला किनारा, यानी झोंका-मोर्चा, कुछ मिनटों तक 60–150 km/h की गति से आगे बढ़ता है और फिर कमज़ोर पड़ जाता है।
- पीछे ठंडी और सूखी हवा आती है। कुछ ही मिनटों में तापमान 5–10°C तक गिर सकता है।
सबसे तगड़े झंझावात सुसंगठित प्रचंड तूफ़ानों से निकलते हैं, जिनकी अधोधाराएँ ढाँचागत होती हैं — बहुकोशिकीय और सुपरसेल क़िस्म के तूफ़ान। नॉरवेस्टर के मौसम में बांग्लादेश ने दुनिया के कुछ सबसे हिंसक झंझावात झेले हैं।
झंझावात भारत और दक्षिण एशिया में
मानसून-पूर्व के हफ़्तों में इस क्षेत्र की परिस्थितियाँ इसके लिए लगभग आदर्श बन जाती हैं:
- निचले स्तरों पर बंगाल की खाड़ी से आती नमी
- 38–44°C तक पहुँचा सतही तापमान, जो अत्यधिक अस्थिरता पैदा करता है
- ऊपरी स्तर की तेज़ पछुआ हवाएँ, जो पवन अपरूपण जोड़ती हैं
- अधोधारा के साथ सतह के तापमान का तेज़ी से लुढ़कना
सबसे अधिक मार झेलने वाले इलाक़े तीन दर्जों में बँटते हैं। पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, बिहार और ओडिशा में प्रचंड नॉरवेस्टर आती हैं। असम, मेघालय और त्रिपुरा में इनकी संख्या कम रहती है, पर तीव्रता कम नहीं होती। पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में ये मध्यम से प्रचंड श्रेणी तक जाती हैं।
कुछ घटनाएँ याद रखने लायक़ हैं। अप्रैल 2018 की कोलकाता–हावड़ा नॉरवेस्टर में 98 km/h तक के झंझावात ने एक ही शाम में कम से कम 15 लोगों की जान ली। मई 2020 में बांग्लादेश और बंगाल पर मानसून-पूर्व तूफ़ान ओलों और झंझावात दोनों के साथ आए। अप्रैल 2023 में कोलकाता पर आई प्रचंड नॉरवेस्टर के कारण विमानों के मार्ग बदलने पड़े।
सक्रिय मानसून के दौरान भी सुसंगठित तूफ़ान झंझावात पैदा करते हैं। ये मानसून-पूर्व वालों से कम तीखे होते हैं — आमतौर पर 60–90 km/h — पर कहीं ज़्यादा बार आते हैं, कई इलाक़ों में रोज़ाना।
भारत के पूर्वी तट और बांग्लादेश के सामने समुद्र में उठने वाले झंझावात मछुआरों की नावें पलटा देते हैं। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवाती तंत्र अपने केंद्र से 200 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर झंझावात पैदा कर सकते हैं।
उखड़े पेड़ और एक शाम का हिसाब
80–120 km/h का एक तगड़ा झंझावात ज़मीन पर क्या करता है, इसकी सूची लंबी है:
- उथली जड़ों वाले पूरे बढ़े हुए पेड़ सबसे पहले उखड़ते हैं
- नालीदार टीन की चादरें और फूस की छतें उड़ जाती हैं
- होर्डिंग, झुग्गियाँ और कच्चे मकान जैसे कमज़ोर ढाँचे ढह जाते हैं
- समुद्र में फँसी छोटी मछली-नावें पलट जाती हैं
- बिजली की लाइनें गिरती हैं और लंबी कटौती होती है
- वाहन अचानक लेन से भटकते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं
- विमानों में झटके लगते हैं; पायलटों को सलाह दी जाती है कि झंझावात-रेखा के प्रचंड तूफ़ानों से कम से कम 20 मील की दूरी बनाकर चलें
2018 की कोलकाता–हावड़ा नॉरवेस्टर ने दिखाया कि एक अकेला झंझावात एक शाम में कितना कर सकता है। गिरते पेड़ों, ढहती दीवारों और करंट लगने से कम से कम 15 मौतें हुईं। लगभग 50 लोग घायल हुए। मेट्रो सेवाएँ दो घंटे से अधिक समय तक ठप रहीं, और उपनगरीय रेलगाड़ियाँ और उड़ानें भी बाधित हुईं।
झंझावात-रेखा और रडार पर दिखता धनुष
अकेला झंझावात और झंझावात-रेखा दो अलग चीज़ें हैं। झंझावात-रेखा गरज वाले तूफ़ानों की एक सुसंगठित कतार होती है, जो अक्सर सैकड़ों किलोमीटर लंबी होती है और जिसके अगले किनारे पर लगातार तेज़ हवा चलती रहती है। दक्षिण एशिया के मानसून-पूर्व तूफ़ान कभी-कभी ऐसी ही रेखा में ढल जाते हैं, जो एक साथ कई ज़िलों को ढक लेती है।
रडार की भाषा में धनुष-प्रतिध्वनि उस झंझावात-रेखा को कहते हैं जो बाहर की ओर धनुष जैसी मुड़ जाती है। यह मोड़ बताता है कि धनुष के शीर्ष पर अधोप्रस्फोट ख़ास तौर पर तगड़े हैं, यानी वहीं सबसे तेज़ हवा पड़ने वाली है।
आने से पहले आसमान क्या बताता है, और वे पंद्रह मिनट
झंझावात बिना चेतावनी नहीं आता। पहचान के संकेत ये हैं:
- पश्चिम या उत्तर-पश्चिम से बढ़ते काले, भारी बादल
- तापमान का अचानक कुछ डिग्री सेल्सियस गिरना
- हवा के साथ आती मिट्टी की तेज़ गंध
- 10 किलोमीटर के भीतर सुनाई देती दूर की गरज
- हवा की दिशा का पलटना — पहले सन्नाटा, फिर अचानक झोंका
- आ रहे तूफ़ान में चमकती बिजली
- निहाई के नीचे थन जैसे लटके बादल, जो प्रचंड उथल-पुथल का संकेत हैं
ये संकेत दिखें तो 5 से 15 मिनट के भीतर आड़ में पहुँच जाइए, क्योंकि झंझावात आमतौर पर इतनी ही देर में आ जाता है।
खुले में हों तो भीतर जाइए — ऊँचे पेड़ के नीचे या खुले मैदान में नहीं; नाव पर हों तो पानी से दूर निकलिए। घर में खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद कीजिए, भीतरी कमरे में जाइए, बाहर पड़ी ढीली चीज़ें पहले ही बाँध दीजिए और बिजली चमकते समय नल-पाइप से दूर रहिए। गाड़ी में दृश्यता गिरे तो किनारे रोककर भीतर ही बैठे रहिए, पेड़ों और खंभों से हटकर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
झंझावात और हवा के झोंके में फ़र्क़ क्या है? झोंका हवा की गति का बहुत छोटा उछाल है, आमतौर पर 3 से 20 सेकंड का। झंझावात कम से कम एक मिनट तक टिकी हुई तेज़ हवा का दौर है। लंबे समय तक पड़ता यही दबाव इसे ज़्यादा ख़तरनाक बनाता है, क्योंकि जो ढाँचे छोटे झोंके सह जाते हैं वे इसमें गिर जाते हैं।
बंगाल की नॉरवेस्टर इतनी हिंसक क्यों होती है? चार चीज़ें एक साथ मिलती हैं — बंगाल की खाड़ी की नमी, तिब्बती पठार का मानसून-पूर्व तपना, ऊपर बहती ठंडी और सूखी पछुआ हवाएँ, और सतह का 40°C से ऊपर गरम होना। इससे संवहनी अस्थिरता चरम पर पहुँच जाती है; CAPE का मान कभी-कभी 4,000 J/kg से ऊपर चला जाता है, जो अमेरिकी मिडवेस्ट के प्रचंड बवंडर प्रकोपों के बराबर है।
क्या झंझावात से बवंडर भी बन सकता है? कभी-कभी हाँ, ख़ासकर सुपरसेल क़िस्म के तूफ़ानों में। बवंडर से होने वाली मौतों की संख्या में बांग्लादेश ऐतिहासिक रूप से दुनिया में सबसे आगे रहा है, और वहाँ कई बड़ी बवंडर घटनाएँ मानसून-पूर्व झंझावात तंत्रों के भीतर ही बनी हैं। 1989 के दौलतपुर-सतुरिया बवंडर ने 1,300 से अधिक जानें लीं।
एक झंझावात कितनी देर चलता है? ज़्यादातर झंझावात 5 से 30 मिनट चलते हैं। लेकिन सुसंगठित झंझावात-रेखा एक ही जगह पर लंबे समय तक तेज़ हवा दे सकती है, क्योंकि उसकी एक के बाद एक कोशिकाएँ उसी इलाक़े के ऊपर से गुज़रती रहती हैं।
अपने शहर की तूफ़ान चेतावनी कहाँ देखूँ? मौसम ऑनलाइन हर शहर के पन्ने पर वर्षा का पूर्वानुमान और प्रचंड मौसम के कोड दिखाता है, जिनमें 95–99 का मतलब गरज वाला तूफ़ान है। NDMA का सचेत ऐप प्रचंड मौसम की चेतावनियाँ देता है। पूर्वी और मध्य भारत के पन्ने यहाँ हैं — कोलकाता, पटना, भुवनेश्वर, गुवाहाटी और भोपाल।