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कोहरा

जमीन से लगा हुआ बादल, जिसमें क्षैतिज दृश्यता 1 km से नीचे चली जाती है। दिसंबर-जनवरी में गंगा के मैदान पर बैठने वाला घना कोहरा दक्षिण एशिया की सबसे ज्यादा उथल-पुथल मचाने वाली मौसमी घटनाओं में है।

घटनाएँ

कोहरा क्या है?

कोहरा असल में एक बादल है जिसका तल जमीन को छू रहा होता है। मौसम विज्ञान की नजर में इसमें और स्ट्रेटस बादल में कोई अंतर नहीं, सिवाय ऊँचाई के — वही बूँदें कुछ सौ मीटर ऊपर तैर रही हों तो हम उन्हें बादल कहते हैं, और सड़क के स्तर पर आ जाएँ तो कोहरा।

पहचान का पैमाना एक ही है: क्षैतिज दृश्यता 1 km से नीचे उतर जाए, तब उस सफेदी को कोहरा गिना जाता है।

उत्तर भारत और पाकिस्तान के पाठक के लिए यह किताबी शब्द नहीं है। नवंबर के आखिर से फरवरी की शुरुआत तक गंगा के मैदान पर — दिल्ली से लाहौर, पटना और ढाका तक — जो परत बैठती है, वह साल की सबसे बाधक मौसमी घटना साबित होती है।

ओसांक से बूँद तक: कोहरा बनने के छह रास्ते

बनने की शर्त हर बार वही रहती है — हवा का तापमान गिरकर ओसांक तक पहुँच जाए। उस बिंदु पर हवा संतृप्त हो जाती है और जलवाष्प संघनित होकर लटकी हुई बूँदों में बदल जाती है, आमतौर पर 5 से 50 माइक्रोमीटर चौड़ी। कोहरे के एक घन मीटर में पानी लगभग आधा मिलीलीटर ही होता है, फिर भी खरबों बूँदें मिलकर रोशनी को इतना बिखेर देती हैं कि सामने की दुनिया सफेद पड़ जाती है।

ठंडक आई कहाँ से — इसी आधार पर मौसम वैज्ञानिक कोहरे को अलग-अलग नाम देते हैं:

कोहरा भारत और दक्षिण एशिया में

धरती पर सबसे फैला और सबसे टिकाऊ कोहरा गंगा के मैदान में बनता है। कोहरे का एक ही घना दौर अंतरिक्ष से पाकिस्तान से बांग्लादेश तक फैली एक लगातार सफेद चादर के रूप में देखा जा सकता है।

उत्तर भारत की परत इतनी घनी क्यों पड़ती है? पाँच वजहें एक साथ काम करती हैं:

  1. उत्तर में हिमालय की दीवार ठंडी हवा को बाहर निकलने नहीं देती।
  2. सर्दियों में दाब का अंतर कम रहता है, हवाएँ सुस्त पड़ जाती हैं और कोहरा एक ही जगह ठहरा रहता है।
  3. सिंचाई, नदियाँ और खड़ी फसलें नीचे की हवा में नमी बनाए रखती हैं।
  4. हर PM2.5 कण बूँद को बनने के लिए एक केंद्रक दे देता है; इसी मेल का नाम स्मॉग है।
  5. तापमान व्युत्क्रमण में सतह की ठंडी हवा के ऊपर गर्म हवा की परत ढक्कन की तरह बैठ जाती है और कोहरे के साथ प्रदूषण को भी नीचे दबाए रखती है।

जिन शहरों में हर सर्दी दृश्यता नियमित रूप से 50 मीटर से नीचे चली जाती है, वे ज्यादातर इसी पट्टी में पड़ते हैं:

उड़ानें, रेल और सड़क पर कोहरे की कीमत

हवाई यात्रा। भारतीय हवाई अड्डे आईसीएओ के CAT III उपकरण-लैंडिंग नियमों पर चलते हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास CAT III-B क्षमता है, यानी वहाँ 50 मीटर जितनी कम दृश्यता में भी विमान उतारा जा सकता है — पर सिर्फ तभी, जब पायलट विशेष रूप से प्रशिक्षित हो और विमान CAT III उपकरणों से लैस हो। कोहरे वाली हर सर्दी में अकेले दिल्ली में सैकड़ों उड़ानें रद्द होती हैं और हजारों देर से चलती हैं। पटना और वाराणसी जैसे जिन छोटे हवाई अड्डों पर CAT III की सुविधा नहीं है, वहाँ अक्सर पूरा परिचालन ही रोक देना पड़ता है।

रेल। दिसंबर के आखिर और जनवरी में उत्तर रेलवे दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के रास्तों पर गाड़ियाँ रद्द करता है या उन्हें घंटों देर से चलाता है। लंबी दूरी की कई गाड़ियों का समय ही बदल दिया जाता है।

सड़क। घना कोहरा हर सर्दी यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एनएच-48 और जीटी रोड पर जानलेवा भिड़ंतों की वजह बनता है। भारत में कोहरे से जुड़ी सड़क मौतें हर साल करीब 12,000 बताई जाती हैं। पाकिस्तान में पंजाब-सिंध गलियारे पर भी ऐसी ही त्रासदियाँ दोहराई जाती हैं।

इसी वजह से दिसंबर-जनवरी में उत्तर भारत की सुबह की यात्रा की योजना बनाते समय तापमान से ज्यादा काम की संख्या दृश्यता होती है।

कोहरा, धुंध, स्मॉग और धुंधलापन — चार अलग चीजें

बोलचाल में ये चारों शब्द एक-दूसरे की जगह चल जाते हैं, पर इनके अर्थ तय हैं:

दिल्ली, लाहौर और आसपास के शहरों पर सर्दियों में जिसे लोग कोहरा कहते हैं, तकनीकी रूप से वह स्मॉग है — कोहरा जिसमें PM2.5 बेहद ऊँचे स्तर पर घुला हुआ है। यही इसे सादे कोहरे से कहीं ज्यादा खतरनाक बनाता है, क्योंकि थोड़ी देर बाहर रहने पर भी साँस में जाने वाले ये कण फेफड़ों को नुकसान पहुँचाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दक्षिण एशिया में कोहरे का मौसम कब रहता है? गंगा के मैदान के लिए — दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और बांग्लादेश — नवंबर के आखिर से फरवरी की शुरुआत तक। दिसंबर और जनवरी सबसे तीखे महीने हैं। मुंबई, चेन्नई और कराची जैसे तटीय शहरों में अभिवहन कोहरा साल भर कभी-कभी बनता रहता है, पर उतना गंभीर नहीं होता। हिमालय की तलहटी में कोहरा किसी भी समय मिल सकता है।

सुबह कोहरा ज्यादा और शाम को कम क्यों होता है? विकिरण कोहरे के लिए जरूरी है कि जमीन ठंडी होकर ओसांक से नीचे चली जाए। साफ रात के बाद यह सबसे मजबूती से रात तीन बजे और भोर के बीच होता है। सूरज निकलते ही हवा का तापमान ओसांक से ऊपर चला जाता है और परत एक से तीन घंटे में उठ जाती है या छँट जाती है।

कोहरे में गाड़ी सुरक्षित कैसे चलाएँ? लो-बीम हेडलाइट या फॉग लैंप जलाएँ, क्योंकि हाई बीम की रोशनी वापस परावर्तित होकर आँखों में आती है। रफ्तार कम रखें और आगे वाली गाड़ी से दूरी बढ़ा दें। सड़क के बाएँ किनारे को रास्ता नापने के लिए इस्तेमाल करें। सड़क पर कभी न रुकें — रुकना ही पड़े तो गाड़ी पूरी तरह किनारे उतार लें। आगे वाली गाड़ी अगर दिख नहीं रही, तो आप उसके बहुत पास चल रहे हैं।

दिल्ली के कोहरे से बदबू क्यों आती है? क्योंकि वह सादा कोहरा नहीं, स्मॉग है। उसमें PM2.5 (कालिख और सल्फेट), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओज़ोन तथा वाहनों, बिजलीघरों और पराली जलाने से उठे कण मिले रहते हैं। गंध पानी की बूँदों की नहीं, इन्हीं प्रदूषकों के मेल की होती है।

अपने शहर की दृश्यता कहाँ देखूँ? मौसम ऑनलाइन हर शहर के पन्ने पर दृश्यता km में दिखाता है, जो सुबह-सुबह निकलने की योजना बनाते समय सीधे काम आती है। देखिए दिल्ली, लखनऊ, पटना और अमृतसर।

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